Sunday, January 25, 2015

Fentency फौजी की बेटी मौज में

Fentency


फौजी की बेटी मौज में

फौजियों का लंड तगड़ा होता है पर उन्हें चूत कम ही नसीब होती है। आईये पढते हैं एक कहानी एक पुलिसिया जवान और उसकी बीबी और जवान बेटी सीमा की। सीमा, उमर अठारह साल पर यार अठारह से ज्यादा, चूंचियां छत्तीस की और गांड भी इतनी ही। कमर है बस अठाइस की और अचरज होता है कि कैसे ये पतली कमर इस भारी भरकम चूंचे का बोझ संभालती होगी। तो आईये सुनाते हैं कहानी आपको एक लड़की की जो हमारे छोटे शहर सीतापुर के एक मुहल्ले की रहने वाली है। पूरवैया कल्चर वैसे तो है बहुत मधुर पर जब इसमें वासना घुलती है तो और मीठे जहर के तरह से रंगीन और रसदार हो जाती है, पता ही नहीं चलता आदमी इस दलदल में कैसे और कब फंस गया। सीमा के पिताजी पुलिस में हैं, और माताजी अकेले सीमा के साथ रहती हैं। एक बात तो जान लीजिए, पुलिस वालों की बीबियां मनमानी होती हैं और उनको लंड का अकाल हमेशा रहता है, अक्सर उनकी ड्यूटी आउट आफ सिटी होती है और चौबीस घंटों की भी होती है। इसलिए वह अक्सर बेवफा और तानाशाही रवैये की होती हैं।
सीमा की मां भी चालीस साल की उमर में भी एक दम से जवान दिखती हैं और उसकी शारीरिक संबंध मुहल्ले के पनवारी, सब्जी वाले दूध वाले, वो सब जिनका कि रोजमर्रा कि जिंदगी में काम है, उन सब वर्ग के दुकानदारों से है। सच तो ये है, सीमा के पापा अक्सर बाहर रहते हैं और घर पर पैसे भी कम देते हैं। कंजूसी में घर कहां चलता है, इसलिए सीमा की मां ने भी अक्सर समझौते कर लिये हैं। सबका मामला सेट है, बड़े चतुराई से मैनेज करती हैं, अपने अपने रिश्ते को। वैसे आईये उसकी फिगर भी बता ही दें। चालीस की उम्र की गदराई हुई आंटी, मस्त चूंचे, पतली कमर फैली प्लेटफार्म जैसी गांड और रसीले होठ। कुल मिला के मलैका जैसी दिखती है और अपनी बेटी से बस जरा सा ही उन्नीस दिखती है। इस वजह से वो भी अपने ब्वायफ्रेंड्स मैनेज करती है।

 

अच्छी बात है कि वो सीमा पर बड़ा नियंत्रण रखती है, पर सीमा जो कि अक्सर अपनी मां की काली करतूत देख रही होती है, उसे अपनी जवानी संभाले नहीं संभल रही। कालेज गर्ल्स का है और बगल में है, इसलिए बाइक पर घूमने जाने और ब्वायफ्रेंड बनाने का सपना उसका पूरा न हो सका, पर सच ये है कि अक्सर सीमा को अपने पापा को देख कर एक उम्मीद बंधती है। वो जानती है उसके पिताजी कितने वफादार, और मेहनती हैं और मां कितना चीट करती है उनको। इसलिए इस बार पापा आएंगे तो उनको भरपूर प्यार देगी और हो सके तो इस बार मम्मी को नीचा दिखा के मानेगी।
तो गर्मी की छुट्टियों में पापा आ गये। मां को मायके जाना पड़ा और इस बार घर में सीमा और पापा रह गये। सीमा ने देखा, इस बार उसका रवैया बदला हुआ था, उसने देखा कि पापा के बदन में चालीस पार होने के बाद भी गजब की मांसल मांसपेशियां हैं और मजबूत बदन, वाले उसके पापा एक दम से जबरदस्त दिख रहे हैं। उसने देखा, पापा का बदन एक दम से एथलिट जैसा है, चौड़ी छाती, सटी गांड और लंबे हाथ, लंबाई तो उनकी वैसे भी अच्छी है। फिर उसका ध्यान गया पापा के लंड के उपर क्या, वो भी उतना ही बड़ा होगा, जितना कि पापा के अन्य अंग हैं। ये तो कमाल की बात होगी, उसने आज पापा को बाथरुम में नहाते हुए देखने के बारे में सोचा। अक्सर पापा बाथरुम का दरवाजा खोलके ही नहाते हैं। आज उन्होंने लंगोट कसी हुई थी। बाथरुम में घुस कर के उन्होने अपने बदन पर पानी डाला और रगड़ रगड़ कर नहाने लगे, इसी बीच सीमा धीरे से पीछे से आकर खुले दरवाजे से उनको देखने लगी। उसे लगा कि आज पापा का लंड देख ही लेना है। पीछे से उसने देखा कि पापा की गांड में लंगोट की रस्सी ऐसे घुसी हुई है कि पिछवाड़ा पूरा नंगा है। उसे बहुत सनसनी हो रही थी। अकेले मर्द और वो, आज उसे अपने बाप में अकेला मर्द दिख रहा था जो कि मौके का फायदा उठाने में कत ई नहीं चूकता। तो सीमा ने अपनी बुर को सलवार के उपर से ही मसलना शुरु कर दिया और सोचने लगी कि कैसे देखूंगी पापा का लंड। अचानक से उसे एक शरारत सूझी।

 

उसने अपने कपड़े उतारकर के सिर्फ ब्रा और पैंटी पहनी और बाथरुम में घुस कर बोली हेलो पापा, मुझे भी नहाना है। उसके पापा ने जब उसे इस रुप में देखा तो अवाक रह गये और उनका लंड एक दम से तन गया। सच तो ये है कि लंड को दिमाग नहीं होता, वह रिश्ते नहीं पहचानता और इसी वजह से अपनी बेटी को अचानक अधनंगी देखते ही सीमा के पापा का लंड तन गया, ढीली और भीग चुकी लंगोट अचानक से खुल कर नीचे गिर गयी।
बड़ा लंड फुफकारने लगा और सीमा जोर जोर से हंसने लगी, बोली पापा ये क्या है ये तो अच्छा खिलौना है, मुझे कभी खेलने को नहीं दिया, ही ही, जरा दो ना और वहीं उसने तपाक से लंड को पकड़ लिया। उसका प्लान सफल रहा। उसने अपने बाप का लंड पकड़ कर मसलना शुरु कर दिया। भीगा लंड तन कर गर्म हो गया था और नर्म नर्म हथेलियों से उसका लन्ड को मसलना और कयामत ढा रहा था।
उसने अपनी बेटी सीमा को दूर करने की कोशिश की लेकिन वो लंड को छोड़ नहीं रही थी और खुद सिपाही का मन भी आज चूत चोदने का कर रहा था। उसकी छिनाल बीबी मायके में थी और बिचारे क ई महीने से चूत से दूर रहने वाले सिपाही को चूत की जोरदार दरकार थी।
उसने सीमा के चूंचे पकड़ लिये और हुक खोल दिया। मारे उत्तेजना के सीमा के स्तन खड़े हो चले थे। जब सिपाही ने अपनी बेटी के चूंचे को पकड़ कर दबाना शुरु किया तो सीमा सिस्कारियां मारते हुए बोली स्स्स, आह्ह, पापा, प्लीज करो ना अच्छा लग रहा है। फिर क्या था। अपनी ही बेटी को चोदने के लिए सिपाही का लंड तो पहले ही तन चुका था, अब वो उसको चोदने के लिए एकदम से बेकरार हो उठा। उसने उसके बदन पर दो लोटे पानी डाल कर भिगा दिया। उसके चूंचों से सरक सरक कर छन के आता हुआ पानी उसके नाभि पर ज्यों ही पहुंचा सिपाही ने उसको अपनी जीभ लगा के लपक लिया। 



इस प्रकार से जैसे उसने अपनी बेटी सीमा के नाभि पर जीभ लगाई, और उपर चूंचों से छन के आते हुए पानी को पीने लगा, सीमा को ऐसा लगा जैसे कि उसकी नाभि एक दम सुर सुराहट से भर गयी हो। कसम से इस एहसास को पाने के लिए वो सालों से तड़प रही थी और आज उसका सपना सच हो रहा था। इधर सिपाही का लंड भी एक दम दन्नाया हुआ था।
उसको हमेशा यह लगता था कि उसकी मां उसके साथ ना इंसाफी करती है और आज उसको पता चल गया था कि इस खेल में कितना मजा आता है। उसने सिपाही के बाल पकड़ कर के अपने नाभि की तरफ उसका सिर और जोर से दबा दिया। उसके बाप की नाक और होठ सब उसके सेक्सी बद्न को टच कर रहे थे। इस बात पर उसके पापा ने उसकी नाभि में अपनी जीभ घुसाकर फिरानी शुरु कर दी। सीमा ने उत्तेजित होकर आंखें बंद कर लीं और कहने लगी, आह्ह पापा बहुत अच्छा लग रहा है। वो बोल रही थी और उसके बाप का जोश बढता जा रहा था। सच में आज सिपाही ने देखा कि वो उसकी बीबी जैसी ही दिखती है, जवानी में सीमा की मां भी तो ऐसा ही दिखती थी। फिर क्या था, उसने अपनी बेटी को चोदने के बारे में अपना निश्चय दृढ कर लिया। वैसे भी, उसकी जवानी और मस्त चूंचे के आगे अब उसकी मां फीकी पड़ चु्की थी।

 

उसने उसकी कोमल त्वचा का रस लेने के लिए जीभ उसके नाभि से उपर बढाई। एक एक इंच सरकते हुए उपर की तरफ, उसने हर इंच को अच्छे से चूमा। पूरी जीभ उसके बदन के हर अक्षांश और देशांतर रे्खा पर फिराने के साथ ही साथ आज उसका इरादा अपनी कुंवारी बेटी के कुंवारे बदन को वो मजा देना था कि बस वो अपने बाप की बन के रह जाए। हालांकि वह जानता था कि यह थाना उसका नहीं है पर उसको तो दूसरे के थाने में ड्यूटी देने की इच्छा थी। अप्ने दामाद के लिए वह काम सुगम बनाने जा रहा था। उसने नाभि से उपर सारा पेट चूम लिया। और फिर पीछे घूम गया। जींस बांधने की जगह से उपर की पीठ पर जीभ की नोक से स्पर्श करते हुए उसने हल्की लार टपकानी भी जारी रखी। भीगा बदन, गर्म जीभ और गर्म बदन के साथ ही उसने सीमा के बदन की गरमी और भी बढानी जारी रखी।
चूसते हुए सीमा के बदन को उसने पूरी नंगी पीठ चूस डाली। अब सीमा अपनी पीठ सिकोड कर यह बता रही थी कि उसको और मजा चाहिए। उसने ब्रा का एक हुक खोल दिया। एक चूंची आगे की तरफ लटक गयी।
अब सिपाही सामने आकर अपनी सीमा बेटी के उस नंगे चूंचे को पकड़ कर के दबाने लगा। ऐसे जैसे कि दूहने की कोशिश कर रहा हो। इस अदा पर सीमा को बहुत आनंद मिल रहा था क्योंकि उसने सर उपर करके आंखें मूंद ली थी और पूरी उत्तेजना को पीने की कोशिश कर रही थी। सिपाही ने उसके चूंचे को मसल के रख दिया और जब वह एक दम लाल और कड़ा हो गया, अपने मुह से लगाकर स्तन पान करने लगा। आह्ह्, आह्ह करती सीमा ने खुद ही दूसरा चूंचा खोल कर अपने बाप के हाथों में थमा दिया।

 

सिपाही अपनी जीत पर मुस्कराया और उसके दूसरे चूंचे को दूहते हुए पहले वाले को चूसता रहा। वो एकदम मस्ती में डोलती रही और खड़े खड़े बाथरुम में ही चुसवाती रही। खैर अब सिपाही ने दूसरे चूंचे का भी वही हश्र किया और आखिर में उसको भी अच्छे से चूसा। चूंचे अब देखने में साढे छत्तीस लग रहे थे। अब बारी थी नीचे कुछ करने की, सीमा ने अपनी पैंटी सरका दी और फिर अपने हाथों से अपनी नंगी चूत ढंक ली।
उसको ऐसा करते देख सिपाही ने सोचा साली गयी है एक दम अपनी रंडी मां पर पर क्या करें चोदने में इसे बहुत मजा आने वाला है। और उसने उसके गांड की तरफ मुह करके उसके दोनों गांड की गोलाईयों को दबोच लिया अपने हाथों से। दबोचने के बाद उसने जोर से उनको दबाया। और हल्के हल्के चपत तेजी से लगाने शुरु कर दिये। गांड हर थपकी के बाद हिल हिल कर अपनी पोजिशन पर आजाती और फिर उस्का बाप उसी तरह से उसको थपथपाता। उसकी गोरी नाजुक चमड़ी एक दम से लाल हो गयी अपने बाप के थपेड़ों से तो उसके बाप ने अपने मुह से एक बड़ा बाईट उसकी गांड पर लिया, ऐसे जैसे कि तरबूज खा रहा हो। सीमा चिल्लाई, पर उसने हल्के दांतों का अहसास कराया था, जो कि उसको अच्छा लगा। वो उत्तेजना में फुसफुसाई, काट लो मेरी गांड को।
और सिपाही ने दूसरे नितंब को भी ऐसे ही किया, हल्के दांत गड़ाकर उसकी गांड को चुदवाने के लिए पैंपर कर लिया। सच तो ये है सिपाही भी बड़ा खिलाड़ी था। चुदाई के मामले में वो राउडी था, भले ही उसकी बीबी उसको सीधा समझती हो।
दोनों नितम्बों को काटकर के उसने अब दो उंगलियां जोड़ीं, हल्का साबुन अपनी बेटी के गांड पर मला और फिर धीरे धीरे करके, उसमें अपने दो उंगलिओं को ठेलने लगा। सीमा चिल्लाई, उईईई, पर कोई बात नहीं थोड़ी देर में दोनों उंगलियां अंदर थीं। अब सिपाही ने अपनी बेटी की गांड फड़ाई शुरु कर दी थी। एक नया अहसास था यह। पीछे से गांड में उंगली पेलने के बाद सिपाही सामने की तरफ आ गया और उसने सीमा के चूत के फांकों पर अपने दोनों होठ रख दिये। इस तरह से उसने होठ रखे कि दोनों होठ एक दम से उसके चूत के फांकों की लंबाई की दिशा में थे। अब वो अपनी कुंवारी बेटी की बुर को चाट चाट कर एक दम रसीली बना देने पर तुल गया था। तो सिपाही अब अपनी बिटिया को चोदने से पहले बुरचटाई के रस्म से नवाज रहा था, मजे से चूत चुसवाती हुई सीमा अपने दोनों चूंचे मल रही थी और बार बार अपनी टांगें सटा के अपने पापा के मुह को दोनों टांगों के बीच चांप दे रही थी। यह एक अत्यंत रोमांचकारी अनुभव था उसके लिए। उसके मुह से सिर्फ एक ही शब्द निकल रहा था, आई लव यू पापा, आप कितने अच्छे हो। आह्ह चूस लो, आह्ह्ह ये तो और अच्छा है, प्लीज फिर से करो ना।

बेटी द्वारा इतना उकसाए जाने पर पुलिस के जवान अधेड़ उम्र के बाप की जवानी भी एक दम शोला बन चुकी थी, उसने अपने लंड को भी अब तक छुआ न था पर वो नीचे लटक कर के एक दम से गदहे के लंड जैसे आकार का हो गया था। समझ में नहीं आता है कि इतने बड़े लंड वाले पति के होते हुए उसकी आखिर उसकी बीबी किसी दूसरे के झांसे में पड़ कैसे सकती है। खैर जो भी हो सच तो ये है कि वो छिनाल हो गयी थी और आखिर में उसके संबंध कितने ही गैर मर्दों से थे। इसलिए उसकी अपनी बेटी भी बिगड़ चुकी थी और आज अपने पापा से ही इश्क फरमा रही थी।
ऐसा सुनने के बाद और बार बार प्लीज दुबारा करो ना कहने पर उसके सिपाही बाप का लंड एक दम हथोड़ा हो चुका था। खून का प्रवाह लंड में अतिरेक से था और एक ऐसे रिश्ते जिसके बारे में सोचा न जा सके, उसमें चोदने की कल्पना करना ही अपने आप में अति उत्तेजक होता है, तो खैर अपने लंड को देखते हुए उसके बाप ने अपनी बिटिया के फुद्दी के फांकों को पीना जारी रखा। लंड एक दम कड़ा हो गया तो उसने सीमा को नीचे बिठा दिया।
घुटनों के बल सीमा बैठ गयी तो उसने अपने अंडे को उसके मुह में डाल कर हिलाना शुरु कर दिया। सीमा उसे अपने होठों के बीच चूस कर ऐसे कर रही थी जैसे कि उसको आमलेट बना देगी। वह बार बार उसको चूसे जा रही थी और वो अपने लंड को अपने हाथों में पकड़ कर मूठ मार कर और भी धारदार बनाने के कोशिश में था। इस प्रकार से अपने लँड को सहलाते हुए और उसके मुह में अंडकोष को देते हुए उसने देखा, सीमा के मस्त चूंचे एक दम से उपर नीचे हो रहे थे, यह एक अत्यंत रोमांचक पल था और नजारा भी। काश कि जिंदगी ऐसे ही चोदते हुए बीत जाती पर ऐसा नहीं होता रियल लाईफ में। ऐसे मजेदार लम्हें कभी कभी ही मिलते हैं। उसने सीमा को अंडों को खूब जम के चूसने दिया।
अब बारी थी देसी मुखमैथुन की। इसलिए उसने सीमा के मुह में अपना बड़ा सुपाड़ा डाल कर के धकियाया। छोटे से मुह और बड़े से लंड के सुपाड़े को देख कर के ऐसा लग रहा था कि कैसे घुसेगा उसके मुह में पर सीमा ने अपनी औकात से ज्यादा मेहनत करके लंड को मुह में ले लिया। किसी छोटी सी चूत के छेद की तरह उसका मुह और होठ उस मोटे लंड पर पकड़ बनाए हुए थे। उसके पापा ने अंदर की तरफ लंड ठेलते हुए देखा कि कैसे उसके आंखें खुली जा रही थीं लंड को अंदर लेते हुए। फिर भी मुखमैथुन का जोर ऐसा चढता है कि फिर रोके से नहीं रुकता है। ऐसा ही हाल था उस समय उन दोनों का। चूंकि सिपाही अपने बेटी की बुर पहले ही चूस चुका था इसलिए उसको अब लंड चूसवाना ही था किसी तरह से।
अब लंड को अंदर ठेल कर हल्के हल्के अंदर बाहर करना शुरु कर दिया। लंड ने जब गति पकड़ी तो कभी सीमा के हलक में उतरा, कभी उसके गालों पर अंदर से मालिश की और कभी तालू का तबला बजाया। पूरे मुह को अखाड़ा बना के रख दिया था सीमा के पापा ने। खैर बेटी को इतना अच्छा गिफ्ट देते हुए आज वो बहुत खुश था। सीमा भी अपनी मां को चैलेंज दे रही थी।

 

अब जब कि लंड मुह की गर्माहट पाकर और भी तन चुका था, बारी थी सीमा के चूत की गहराई की थाह लेने की। उसके पापा ने उसको कंधे पर उठाया और बाथरुम से उठा कर सीधा बेडरुम मे बेड पर पटक दिया। उसके टांगों को खोल कर बिना बाल वाली कुंवारी चूत को नजदीक से देखा, एक दम गुलाबी चूत के अंदर छोटा सा छेद और उसमें झलकती हायमन का नजारा। उसको याद आया, इसकी मां तो बिना हायमन मतलब कि फटी हुई चूत लेके आई थी, चलो कमसे कम अब उस कमी को उसकी बेटी पूरा कर रही है।
उसने उसके पैरों को कमर तक बेड के बाहर खींच लिया और अपने हथौड़े जैसे मोटे और गदहे जैसे लंबे लंड को उसके चूत के उपर रगड़ना शुरु किया। अब सीमा को डर लग रहा था, उसने कहा – पापा मुझे कुछ होगा तो नहीं न, मुझे डर लग रहा है। इस बात पर सीमा के पापा ने कहा, नहीं बेटा ये सब तो बस खेल जैसा है, थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा। और सिपाही ने सीमा के चूंचे पकड़ लिये और फिर अपने लंड को उसके छेद के उपर टिका दिया।
अपने हाथों से उसके मुह को बंद करने के बजाय बेडरुम के ड्रावर में रखा चाकलेट निकाला और उसको थमा के बोले, ले इसको एक ही बार में खा जा, इसके बाद जब तक तू इसे निगलेगी। सब कुछ हो जाएगा, डरने की कोई जरुरत नहीं है।
सीमा ने एक बड़ी बाईट कैडबरी की ली और उसके पापा ने उसके चूत में अपने लंड का कीला ठोक दिया। दन्न से चूत की झिल्ली की बखिया उधेड़ते हुए लौड़ा उसके बच्चेदानी के दरवाजे पर टकराया, चरम सुख देने वाले जी स्पाट का लंड के सुपाड़े से स्पर्श और कोमल और नाजुक झिल्ली का फटना दोनों एक साथ हुआ। अब सब कुछ आसान था, हालांकि सीमा के हाथ से चाकलेट छूट चुकी थी पर फिर भी एक टुकड़ा मुह में था, दर्द के साथ चाकलेट का स्वाद भी कसैला हो चला था पर लंड के अंदर जाने के बाद उसकी मिठास और भी बढ़ गयी। अब सीमा अपने पापा की रखैल बन चुकी थी और वो भी उसे अपनी प्रेमिका की तरह ही ट्रीट कर रहा था। उसके चूंचों को मलते हुए और अंदर की तरफ पुरजोर धक्के लगाते हुए सि्पाही जी ने सीमा को अपने लंड का स्वाद चखाना जारी रखा। आधे घंटे तक इस स्टाइल में चोदने के बाद उसने अपना वीर्य अपनी बेटी को पिला दिया। और फिर यह लड़ाई लंड और चूत की, पहले दिन तो आठ घंटे कामुकता के रसीले और रंगीन खेल में चलती रही।








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