Sunday, February 8, 2015

Fentency दीदी का ससुराल -1

Fentency

 दीदी का ससुराल -1


हैल्लो दोस्तों, में आज आपको अपनी एक कहानी बताने जा रहा हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि आपको ये बहुत पसंद आयेगी।
अब सबसे पहले में अपना परिचय आपको कराता हूँ, मेरा नाम करन है और मेरी उम्र 23 साल की है। मेरे पापा विनोद लाल उम्र 55 साल और वो रेलवे मे नौकरी करते है और माँ सुशीला जिनकी उम्र 51 साल वो एक हाउसवाईफ है और इसके अलावा मेरी दीदी मीनू, उनकी उम्र 27 साल की है और उनकी शादी तीन साल पहले ही हो चुकी है।
ये कहानी आज से दो साल पहले की है जब मेरे पिताजी की पोस्टिंग एक छोटे से कस्बे मे थी और शहर यहाँ से 45 किलोमीटर दूर है, आप तो जानते ही है कि छोटे से कस्बे मे भला क्या होगा दो तीन स्कूल के अलावा और कोई भी कॉलेज तो होगा नहीं और अगर हुआ तो भी वो कोई काम का नहीं होगा। ठीक वैसे ही मेरे कस्बे का हाल है इसलिए मुझे कॉलेज कि पड़ाई के लिए शहर के कॉलेज मे एडमिशन लेना पड़ा था।
दोस्तो यहीं से मेरी कहानी की शुरुआत होती है मेरी दीदी का ससुराल पास के शहर में ही है और अब में शहर के कॉलेज मे एडमिशन लेने शहर गया और वहाँ पर में अपनी दीदी के ससुराल में ही रुका था।
दीदी के ससुराल में चार लोग है जिसमे से तीन ही घर पर है। एक दीदी के ससुर जी हरिलाल, उम्र 55 साल वो नौकरी से रिटायर्ड हो चुके है, मेरे जीजाजी मुकेश उनकी उम्र 28 साल की है और वो अभी बाहर नौकरी पर है, उनके अलावा दीदी की ननद कीर्ति उसकी उम्र 22 साल है, दीदी कि सास नहीं है उनका देहांत दीदी की शादी के पहले ही हो चुका था, इसलिए घर पर सिर्फ़ तीन ही लोग है।
में अब शहर कॉलेज मे एडमिशन लेने के लिए शहर गया। दीदी कि शादी के बाद ये मेरा दूसरा मौका था, जब में उनके ससुराल गया था, इससे पहले शादी के तुरंत बाद दीदी को लेने गया था और आज दूसरी बार गया था।
मुझे दीदी बहुत खुश नज़र आ रही थी और उनके ससुर जी भी बहुत खुश थे और वो ही मुझे लेने बस स्टेण्ड आए थे। मेरे मना करने के बाद भी मुझे लेने आए थे। में उन्हें बाबूजी कहकर बुलाता था। वो भी मुझे बहुत इज्जत देते थे। बस स्टेण्ड पर मैने उन्हें देखते ही उनके पैर छुए और प्रणाम किया और अपने दोनो हाथो से मुझे पैर छुने से पहले ही उठा लिया था और घर पर पहुंच गये।
में : दीदी कैसे हो आप?
दीदी : अच्छा आज सामने है, तो तुझे याद आया और पिछले 6 महीनो से याद नहीं आई तुझे दीदी की।
में : आप तो जानते ही हो कि पिताजी ने साफ कह दिया था, अगर अच्छे नंबर नहीं मिले तो घर से निकाल देंगे इसलिए में सारा दिन पढ़ाई मे ही लगा देता था।
दीदी : चलो अब बहाने मत बनाओ इतनी भी क्या पढ़ाई कर रहा था कि अपनी एक ही दीदी से फोन पर दो मिनट बात भी नहीं कर सकता था।
में : अच्छा अब दोबारा ऐसी ग़लती नहीं होगी वैसे आपको भी तो एक साल हो गया एक बार भी घर नहीं आई हो।
दीदी : चल छोड़ ये सब तू यही पर तू नहा ले में तब तक में तेरे लिए चाय बनाकर लाती हूँ।
में अब जल्दी जल्दी नहा कर वापस आ गया। दीदी भी चाय बनाकर लायी और मुझे दी। अब हम दोनो बाहर के हॉल मे ही बैठकर चाय पीने लगे थे और बाते करने लगे थे, तभी दीदी की ननद कीर्ति आई, में तो बस एक झलक उसे देखता ही रह गया क्या लग रही थी। उसे भी में लगभग दो साल बाद देख रहा था। अब उसका जिस्म काफ़ी भर चुका था, क्या फिगर था। मेरा लंड तो पेंट के अंदर ही मानो पानी छोड़ देगा। लेकिन में सर नीचे कर चुपचाप चाय पीने लगा था।
अब कीर्ति आकर दीदी के पास खड़ी हो गई थी और मुझसे कहने लगी कि आप कब आये तभी मैने कहा कि में अभी थोड़ी देर पहले ही आया हूँ, वैसे आमतोर पर में लड़कीयो के मामले मे थोड़ा शरमाता हूँ, लेकिन कीर्ति की खूबसूरती एक पल के लिए मेरे मन मे ज़ोर ज़ोर से हिलोरे लेने लगी थी। लेकिन अब मैने जल्दी से अपने आप पर काबू कर ही लिया था। इसी तरह दीदी से बात करते करते कब दिन निकल गया पता ही नहीं चल रहा था और शाम को खाने पर दीदी ने मेरी सारी मनपसंद चीजे ही बनाई थी, खाने की टेबल पर हम सभी एक साथ बैठे। बाबूजी बोले – अच्छा क्या करना है आगे बेटा, में कहने लगा कि अभी तो कॉलेज में पढना है, फिर हो सकेगा तो MBA भी करने की कोशिश करूंगा बाबूजी।
बाबूजी – बहुत अच्छे बहुत अच्छे, करो बेटा तुम्हे यहाँ पर कोई परेशानी नहीं होगी और फिर ये आपकी दीदी है, हम है, घर है, कोई चिंता करने कि ज़रूरत नहीं है। फिर कीर्ति भी बी-कॉम करना चाहती है। तुम एक ही कॉलेज मे रहोगे तो उसे भी जरूरत पड़ने पर तुम्हारी मदद मिल सकती है। तुम भी उसे पड़ा सकते हो।
अब में गर्दन झुकाए – जी बाबू जी क्यों नहीं, बोल कर खाना खाने लगा था, खाना खत्म कर कीर्ति अपने कमरे मे जो कि ऊपर था और बाबूजी हॉल मे लेट गये थे। दीदी मुझे मेरे कमरे मे लेकर गई जो कि नीचे ही था। वो कमरा बहुत बड़ा था। लेकिन कमरे मे सिर्फ एक पलंग ही रखा था और एक टेबल थी। दीदी का कमरा हॉल के दूसरे किनारे गली मे था, जिसमे अटेच बाथरूम था।
दीदी बोली जाओ अब तुम सो जाओ हम कल बात करेंगे और वो अपने कमरे मे चली गई, दीदी जाने से पहले दीदी मेरे लिए एक जग पानी रख गई उन्हें अच्छे से मालूम है कि मुझे देर रात उठकर पानी पीने कि आदत है। में बिस्तर मे काफ़ी देर तक लेटे रहा। लेकिन मेरी नींद थी कि आने का नाम ही नहीं ले रही थी। में बिस्तर मे पड़े पड़े करवटे ले रहा था। मैने घड़ी मे देखा तो दो बज रहे थे और ऊपर से मुझे तेज बाथरूम लगी थी। कमरे मे अटेच बाथरूम तो था नहीं, इसलिए हॉल मे बने बाथरूम मे चला गया हॉल मे काफ़ी अंधेरा था। में किसी तरह धीरे धीरे रेंगते रेंगते बाथरूम के दरवाजे तक पहुँच गया और अंदर चला गया अंदर लाइट ऑन करके बाथरूम करके वापस बाहर निकला लाइट अब भी ऑन थी जिसकी वजह से हॉल मे काफ़ी रोशनी हो चुकी थी, तभी मेरी नज़र हॉल के बिस्तर पर गई बाबूजी वहा पर नहीं थे।
में एक पल के लिए सोच मे पड़ गया कि बाबूजी कहाँ चले गये, में तेज़ी से बाहर के दरवाजे तक गया, लेकिन दरवाजा अंदर से ही बंद था, फिर मैने सोचा कि हो सकता है वो छत पर सोने गये हो और बाथरूम के पास आकर उसकी लाइट ऑन रहने दी। में अभी पलटा ही था इससे पहले मुझे किसी कि आवाज सुनाई दी वो दीदी का कमरा था। में किसी तरह कमरे के पास पहुंचा। कमरे से हल्की रोशनी आ रही थी।
अब मैने अंदर देखने की बहुत कोशिश की लेकिन मुझे दरवाजे में ना कोई दिखा और ना कोई छेद नज़र आया, जिससे मे अंदर देख सकूँ, तभी मेरा हाथ दरवाजे की खिड़की से छू गया में हल्के हाथों से खिड़की को खोलने लगा था, वो खिड़की आपस मे सटी हुई थी तो अब मैने धीरे से खिड़की खोल दी।
अब अंदर का नजारा देखकर में दंग रह गया बाबूजी यानी हरिलाल जी मेरी दीदी को अपनी बाँहों मे लिए हुए थे। कमरे मे जो रोशनी थी, वो बाथरूम की लाइट के दरवाजे से थी, जिससे सिर्फ़ आधे कमरे तक ही रोशनी थी। लेकिन दीदी और बाबूजी खड़े थे, वो दोनों साफ साफ नज़र आ रहे थे, हरिलाल जी मेरी दीदी को कहने लगे – देखो बहु मान जाओ वरना हमे तुम्हारी चूत मे जबरदस्ती से लंड डालना पड़ेगा। दीदी – नहीं बाबूजी, प्लीज आज नहीं करते है, हम कल चुदाई करेंगे।
बाबूजी – नहीं जानेमन अभी इसी वक़्त, देखो मेरे लंड कि क्या हालत है और उन्होंने दीदी के हाथो को पकड़ कर अपनी लूँगी के ऊपर लंड पर रख दिया था। दीदी – बाबूजी प्लीज मत कीजिये कि तभी बाबूजी ने अपने होंठ दीदी के होंठ पर रख कर चूमने लगे थे। दीदी अपने ससुर की बाँहों मे अह्ह्ह कर रह गई, बाबूजी बस अब और नहीं प्लीज, नहीं बहू अभी तो ये खेल शुरू हुआ है, जाओ और ये पहन कर दिखाओ। दीदी – ये क्या है। बाबूजी – तुम्हारे लिए है बहू, अब जल्दी से जाओ बोल कर दीदी को एक पेकेट हाथों में देकर बाथरूम के अंदर जाने के लिए बोला और दीदी उसे लेकर अंदर बाथरूम में चली गई थी।
कुछ देर बाद दीदी बाथरूम से बाहर आती है, क्या क़यामत लग रही थी दीदी। दरअसल दीदी ने पहना ही कुछ ऐसा था कि जिसे देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो गया था। अब दीदी ने हल्के लाल रंग की नाईटी पहन रखी थी जो कि उनके बड़ी सी गांड को ढके हुए थी उनकी चूचीयां भी आधे बाहर की और थी। आज पहली बार अपनी बहन को इस हालत मे देख रहा था, उसका फिगर कोई 34-30-36 का होगा। दीदी एकदम विदेशी लग रही थी।
हरिलाल जी बिस्तर पर लेटे हुए थे और वो दीदी को देखकर बिस्तर पर ही बैठ गये और कहने लगे वाह बहू क्या चीज़ हो आप और दीदी के हाथो को पकड़ कर बिस्तर पर खींच लिया। अब दीदी हरिलाल जी के ऊपर थी और उनकी गोरी गांड मेरी तरफ थी, हरिलाल जी दीदी कि गांड पर अपने दोनो हाथ रखकर दबाने लगे थे, दीदी अहाा….. बाबूजी फिर हरिलाल जी दीदी को नीचे बिस्तर पर लेटा कर उसकी दोनों टांगो के बीच आ गये थे।
अब दीदी की टांगो को अपने हाथो मे लेकर बारी बारी से उसकी दोनो टांगो को चूमने लगे दीदी के मुँह से सिसकारियां निकल पड़ी बाबूजी छोड़ दो प्लीज अह्ह्ह्हह हरिलाल जी ने धीरे धीरे अपनी बनियान को उतार कर नीचे ज़मीन पर फेंक दिया और कहने लगे बहू तुम तैयार हो जाओ आज हम तुम्हे ऐसे चोदेंगे कि तुम क्या याद करोगी कि किसी मर्द से पाला पड़ा है और दोनो हाथो से दीदी के हाथो को पकड़ कर अपना मुँह दीदी के आधे बाहर निकली चूचीयों के ऊपर रख कर चूमने लगे थे। दीदी कि सिसकारियां अभी भी चालू थी सस्स्स्स्शह…… धीरे धीरे हरिलाल जी ने अब दीदी कि दोनो चूचीयों को नाईटी के बाहर कर दिया दीदी को पता ही नहीं चला था।
वो भूखे कुत्ते कि तरह दीदी कि चूचीयों पर टूट पड़े थे। कभी दोनो चूचीयों को जीभ से चाटते तो कभी चूचीयों को एक एक कर के मुँह मे भरकर चूसते तो कभी उसे दोनो हाथो से मसलने लगे थे और दीदी बस अहह….. करती जाती।
फिर हरिलाल जी दीदी की चूचीयों को दोनो हाथो से मसलते रहे और दीदी की नाभि और पेट पर अपनी जीभ इधर उधर करने लगे थे और दीदी के दोनो हाथो को पकड़ कर दीदी की चूचीयों को मसल रहे थे। हरिलाल जी फिर दीदी कि चूत के नज़दीक पहुँच गये थे और अब मेरी सांसे भी तेज हो चली थी, जिसका कारण था कि अब मुझे दीदी कि चूत जो दिखने वाली थी। वैसे तो मैने चूत बहुत देखी हुई है, लेकिन वो सिर्फ़ टीवी पर ब्लू फ़िल्मो पर, मेरे कई दोस्त अक्सर इसका जिक्र किया करते थे। उन्ही की वजह से मैने ब्लू फिल्म देखना शुरू किया था।
लेकिन आज में पहली बार टीवी से अलग निजी जिंदगी मे चूत के दर्शन करने जा रहा था। एक पल के लिए मन मे ख्याल आया कि ये और कोई नहीं मेरी दीदी है और मेरे लिये चूत के दर्शन करना पाप होगा। लेकिन मेरे पैर जैसे वहां जम से गए थे और में चुपचाप खड़े होकर देख रहा था।
हरिलाल जी ने फिर दोनो हाथो से दीदी कि पेंटी को नीचे खीचकर उनसे अलग कर दिया था, दीदी की गौरी चूत के दर्शन मुझे साफ साफ हो रहे थे। चूत के पास कोई बाल नहीं था। एकदम साफ थी, चूत का मुँह हल्का खुला हुआ और फूली हुई थी। हरिलाल जी एक हाथ से दीदी कि चूत पर अपनी ऊँगली को फेरने लगे थे। और फिर अपना लंड चूत के अंदर डाल दिया था।
दीदी अह्ह्ह कर अपने दोनो हाथो से हरिलाल जी के सर पर हाथ रखकर बाल पकड़ लेती और हरिलाल जी अपनी आधे लंड को दीदी कि चूत के अंदर डालकर धक्के दे रहे थे। बहुत देर तक हरिलाल जी दीदी कि चूत को मुहं से तो कभी अपने दांतो से हल्के हल्के नोचते रहे थे और दीदी स्शह…… करती रही, फिर अचानक हरिलाल जी रुक गए और बिस्तर पर ही खड़े हो गये। दीदी अभी लेटी हुई थी, हरिलाल जी ने अपनी लूँगी को खोल कर अलग कर दिया। वो अब पूरी तरह नंगे थे, हरिलाल जी ने चड्डी नहीं पहनी थी, इस वजह से उनका लंड सामने खड़ा था कोई 6-7 इंच लम्बा और 2-3 इंच मोटा होगा। हरिलाल जी ने खड़े खड़े ही बोला – क्यों बहू कैसा है हमारा लंड, देखो इसे, अब यह अभी तुम्हारी चूत फाड़ेगा और तुम मजे लेना।
दीदी कुछ नहीं बोली बस लंड को घूरे जा रही थी, फिर हरिलाल जी ने लंड को एक हाथो से पकड़ कर दीदी के मुँह के पास पंहुचा कर लंड को दीदी के मुँह मे डाल दिया। दीदी ने भी कोई विरोध नहीं किया बल्कि सर को ऊपर कर पूरा लंड मुँह मे लेने लगी। अब कमरे मे गुउुुुुउउन्न की आवाज़ आने लगी थी, हरिलाल जी दीदी के सर को दोनो हाथो से पकड़ कर पूरे जोश मे लंड दीदी के मुँह मे डाल रहे थे। हरिलाल जी दीदी के मुँह कि चुदाई किये जा रहे थे। मुझे साफ साफ दीदी के चहरे से पता चल रहा था कि उन्हें साँस लेने मे तकलीफ हो रही थी। लेकिन हरिलाल जी थे कि लंड को मुँह मे डाले जा रहे थे।
दीदी एक हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी और बीच बीच मे एक उंगली चूत के अंदर डाल रही थी, बहुत देर तक हरिलाल जी दीदी के मुँह मे लंड को डालते रहे, फिर अपने लंड को दीदी के मुँह से बाहर निकाल लिया लंड बाहर निकालते ही दीदी ने हफफफ कर साँस अपने अंदर खींची। हरिलाल जी जल्दी से दीदी कि टांगो के बीच मे आ गये थे और दीदी कि टांगो को पकड़ कर अपनी कमर पर रख लिया था।
हरिलाल जी ने लंड को दीदी कि चूत के पास रखा और अपने दोनो हाथो से दीदी कि कमर पर रख कर एक जोर का धक्का लगा दिया लंड चूत मे एक बार में चला गया। दीदी आआहह… कर अपने मुँह पर हाथ रख लिया। हरिलाल जी कुछ देर चुपचाप ऐसे ही रहे फिर एक के बाद एक धक्के लगाते हुए पूरे लंड को दीदी कि चूत मे डाल दिया था।
दीदी आआ……….. बाबूजी ……..धीरे हमे तकलीफ़ हो रही है कह कर अपने हाथो से आवाज को अपने अंदर ही दबा रही थी, हरिलाल जी के चहरे मे मुस्कान थी, अरे मेरी बहू हमे माफ़ करो, लेकिन रंडियों की चुदाई धीरे धीरे नहीं होती है। तभी दीदी बोली तो हमें आपने क्या रंडी समझा है, हरिलाल – जी हाँ बहू आप रंडी है लेकिन सिर्फ हमारे लिए, ये आपका जिस्म सिर्फ और सिर्फ हमारे लिए है, बहू इसके लिए तो हम और कई देशो से लड़ाई लड़ सकते है।
अब दीदी के चहरे पर भी ये सुनकर मुस्कान आ गई और दीदी एक हाथ से हरिलाल जी के सर पर फेरने लगी और अपनी कमर को हिलाने लग रही थी।
हरिलाल जी धीरे धीरे दीदी कि चुदाई करने लगे थे और फिर थोड़ी ही देर मे चुदाई तेज़ी से होने लगी थी, हरिलाल जी दीदी कि कमर को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से लंड अंदर बाहर करके डाल रहे थे, दीदी आहह..बाबूजी… आहह… फिर करीब 10 मिनट बाद हरिलाल जी ने दीदी कि टांगो को कमर से हटा कर उसे दोनो हाथो से पकड़ कर दीदी के कंधों पर रख दिया था।
दीदी कि चूत और ऊपर की तरफ हो गई। हरिलाल जी ने फिर से दीदी कि चुदाई तेज़ी से चालू कर दी। दीदी अपने हाथो से अपनी टांगो को पकड़े हुए थी। उनकी गांड से हरिलाल जी कि जांघ टकरा रही थी। दीदी कि आआहह और बाबूजी की आवाज के साथ अब कमरे में फच-फच की आवाज आ रही थी।
हरिलाल जी अपना लंड आधा बाहर निकालते और फिर तेज़ी से लंड को ज्यादा तेज स्पीड से चूत मे डाल देते। दीदी हर बार आहह… बाबूजी आआआ कर रही थी। हरिलाल जी बोले बहू तुम्हारी चूत बहुत कमाल की है, इसे जितना भी चोदो लगता है एकदम ताज़ा चूत है। मेरा लंड और दिल तो इसे चोद कर बागबाग हो जाता है बहू और फिर उन्होंने अचानक से स्पीड कम की शायद अब वो झड़ने वाले थे लेकिन जोश पूरा था। उन्होंने दीदी को पूरा हिला कर रख दिया था। अब दीदी का हाल बहुत बुरा था वो दर्द से चीख रही थी। लेकिन बाबूजी को तो आज चूत फाड़नी थी और वो नहीं रुके और चोदते रहे फिर थोड़ी देर बाद बाबूजी झड़ने लगे उन्होंने चूत में ही पूरा वीर्य निकाल दिया था।
चूत में वीर्य के गिरते ही दीदी पूरी अकड़ गई और कहने लगी बाबूजी आपने मेरे मना करने पर भी आज चूत को फाड़ ही दिया, अब में क्या करूं। तभी वो कहने लगे तुम चिंता मत करो बहू चूत फाड़ने के लिये ही बनी है। जब तक नहीं फटती मजा नहीं आता, आज में बहुत खुश हूँ और फिर उन दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और लेट गये थे। लेकिन उनकी इस चुदाई से मुझे बहुत मजा आया। लेकिन मेरा लंड बिना चूत के ही बैठ गया और में अपने कमरे में चला गया और जाकर सो गया था।
दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में …











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