Tuesday, February 10, 2015

Fentency मेरी कहानी

Fentency

  मेरी कहानी
मेरा नाम रेणु है और मैं यह सच्ची कहानी लिख रही हूँ. मैं अपने कॉलेज के एक लड़के से प्यार करती थी और यह कहानी उसी के बारे में है. हम कैसे मिले, कैसे प्यार हुआ और कैसे बिस्तर तक पहुचे यह मैं इस कहानी में नहीं लिख रही हूँ. पर आशा करती हूँ कि यह कहानी आपको पसंद आयेगी..

अगले दिन सुबह जल्दी ही हम दोनों अमित के दोस्त के यहाँ जाने के लिए निकल गए.  अमित का दोस्त पहले ही अपने घर के लिए निकल गया था और अमित ने पहले से ही उससे घर की चाभी ले रखी थी. अब पूरे दिन हम दोनों को कोई परेशान करने वाला नहीं था.  उसकी bike पर मैं पीछे बैठी थी. कोई आधे घंटे के सफ़र के बाद हम दोनों अमित के दोस्त के यहाँ पहुँच गए. अमित ने घर का दरवाजा खोला और हम दोनों के अन्दर जाते ही उसने दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया. मेरा बहुत मन कर रहा था कि हम दोनों लिप किस करें. इसके लिए मैं कुछ भी करने को तैयार थी. अभी सुबह के ७ ही बजे थे और हमारे पास शाम के ६ बजे तक का समय था. हम लोग drawing रूम में खड़े थे. मैं जल्दी से जल्दी अमित के होठों को चूमना चाहती थी.  मैंने सलवार सूट पहना हुआ था और उसने जींस टीशर्ट. बेडरूम में जाते ही मैंने अमित को मेरी तरह घूमने का इशारा किया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए. हमने थोड़ी देर ऐसे ही खड़े खड़े किस किया. फिर उसने कहा कि जान मैं तुम्हें लिटाकर अच्छे से किस करना चाहता हूँ. मुझे गोदी में उठाकर उसने बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी बगल में आकर लेट गया. मेरी ओर करवट लेकर उसने अपने होंठ मेरे होठों पर रख दिए और किस करने में मगन हो गया. करीब 10 से 15 मिनट तक किस करने के बाद जब मेरा मन भर गया तो मैं कहा कि अमित thank you very much. तुम मुझे बहुत प्यार करते हो और मैं भी तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ. उसने कहा कि रेणु मैं तुम्हें बिना कपड़ों के देखना चाहता हूँ.

मैंने प्यार भरे स्वर में कहा कि मैं तो तुम्हारी हूँ जान, जो चाहे कर लो मेरे साथ. अमित ने मेरा दुप्पट्टा अलग किया और मेरे उभरे हुए बूब्स को देखने लगा. सूट मैं काफी fitting वाला ही पहनती हूँ. इतनी देर से चल रहे होठों के चुम्बन से मैं थोड़ी सी गरमा भी गई थी इसलिए निप्प्ल भी कड़क हो गए थे और मेरे नीले सूट के ऊपर से अलग से ही नज़र आ रहे थे. अमित थोड़ी देर उन्हें देखता रहा. मैंने ही उसे बढ़ावा देने के लिए कहा कि अमित सिर्फ देखोगे ही? छूने का मन नहीं कर रहा? कहने लगा कि डर लगता है कहीं तुम बुरा ना मान जाओ. मैं लेटी हुई थी और वो मेरी बगल में ही कोहनी के सहारे लेटा हुआ था मेरी ओर करवट लेकर. मैंने अपने होठों को उसके होठों के ऊपर रखा और एक बार फिर से किस किया और उसका हाथ पकड़ कर अपने लेफ्ट बूब पर रख दिया और कहा कि मैं तुम्हारी हूँ अमित सिर्फ तुम्हारी. तुम जो भी करोगे मुझे अच्छा ही लगेगा. वो मेरे सूट के ऊपर से ही मेरे निप्पल को touch करने लगा. और बूब को हलके हलके सहलाने लगा. सूट बहार से ख़राब ना हो इसलिए मैंने सोचा कि उसे उतार देना ही ठीक रहेगा. मैंने उसका हाथ हटाया और कहा कि मेरे प्यारे अमित, मुझे toilet  जाना है. मैं अभी आती हूँ. वो बिस्तर पर लेट गया. toilet  से आने के बाद मैं बिस्तर के एक किनारे पर खड़ी हो गई और अपना सूट उतारने लगी. सूट उतरने के बाद मैं एक ब्लैक लेस ब्रा में आ गई जिसमे से मेरे दूधिया बूब्स बहार झांक रहे थे. वो उठने को हुआ तो मैंने उसे लेटे रहने का इशारा किया. अपनी सलवार का नाडा मैंने खुद खोला और सलवार को नीचे गिर जाने दिया. अब वो बिस्तर पर उठकर बैठ गया. दीवार के सहारे पीठ लगाकर. मैंने अपनी सलवार और सूट अछे से तह करके अलमारी में रख दिए. अब मैं catwalk  करके उसकी ओर बढ़ी. उसका मन मचल उठा. जैसे ही मैंने उसके पास आई उसने मेरे बूब्स पर हाथ लगाने कि कोशिश की, मैंने उसे हाथ लगाने दिए और कहा कि अमित मैं तुम्हें थोडा और मज़ा देना चाहती हूँ, तुम्हें अच्छा लगेगा. मैंने साइड में पड़े अपने बैग को उठाया और लेकर बेडरूम से बहार निकल गई. kitchten  में जाकर मैंने ब्लैक सेट से रेड में change किया. रेड सेट में मैं और भी ज्यादा दिखा रही थी. ब्रा का कपडा काफी हल्का था और panty सामने से मेरे गुलाबी होठों को छुपा पाने में असमर्थ थी, मेरे गोल गोल मखमली चूतड भी बस थोड़े से ही ढके थे. उसके सामने मैं मटकती हुई गई और खूब घूम घूम कर उसे बस दिखा दिखा कर यह कहकर वापस kitchen  में आ गई की अभी तो शुरू हुई हूँ. अभी तो बहुत कुछ दिखाना बाकी है.  

इस बार एक बहुत ही पतली सी ब्रा और panty  पहनी और ऊपर से एक पारदर्शी साडी पहनी और उसके सामने पहुँच कर उसे परेशान लगी. मैंने देखा कि उसका लंड बुरी तरह खड़ा हो चुका था. मैंने अब ज्यादा देर करना ठीक नहीं समझा और इस बाद बस एक तौलिया लपेट कर उसके पास आ गई.

मेरी ब्रा के straps दिख रहे थे और उसके पास आकर मैंने उसके गले में हाथ डाल दिए और अपने दोनों पैर उसके पैरो से साइड में रख दिए. उसके होठों को प्यार से किस किया और पूछा कि अमित जान तौलिया उतारोगे नहीं क्या? उसने झटपट से तौलिया निकल फेंका. फिर ब्रा का हुक भी खोल दिया. मेरी बाँहों में से मेरी ब्रा को भी निकल फेंका. मैंने भी मस्ती में आकर उसके हाथों को पकड़कर अपने बूब्स पर रखते हुए कहा की इनकी असली जगह तो यहाँ पर है जान. उसने दोनों बूब्स को कस कस के दबाना शुरू किया, मैंने आह भरते हुए कहा कि अमित जानू थोडा आराम से, मैं कहीं भागी नहीं जा रही. उसने बूब्स दबाना धीरे कर दिया और प्यार से सहलाने लगा. साथ ही मेरे होठों को चूमे जा रहा था. मुझे बहुत मजा आ रहा था. थोड़ी देर के बाद मैंने कहा कि अमित यह क्या, यह बात गलत है कि तुमने अपने कपडे नहीं उतारे हैं. उसने शरारत भरे स्वर में कहा कि तुम ही उतार लो. मैंने जल्दी से उसकी टी शर्ट उतारी, उसने अपने हाथ ऊपर कर लिए. जल्दी से उसकी जींस भी उतार दी. उसके underwear का टेंट बन चुका था. underwear के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ लिया और मसल दिया. जल्दी से उसके underwear को भी उतार दिया. उसके लंड को देखकर मैं खुश हो गई. इतना मोटा ताज़ा और प्यारा लग रहा था वो. उसके लंड को हाथ में लेकर मैं प्यार से सहलाने लगी. वो बेचैन होने लगा और मुझे जल्दी से बिस्तर पर लिटा कर मेरे ऊपर आ गया. मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से दबा दिया और अपने सीने से मेरे बूब्स दबाने लगा. अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया, पर मैंने अभी अपनी panty  नहीं उतारी थी. मेरे होठों को बेतहाशा चूमने लगा. मैं भी मजे लेने लगी. जब वो अपना लंड अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा तो मैंने कहा कि अमित panty  तो उतार लो आराम से. मैं तुम्हारी ही हूँ और हमारे पास शाम तक का समय है. उसने मुस्कुरा कर कहा कि जान मैं जल्दी से जल्दी अन्दर आना चाहता हूँ. मैंने एक लम्बी सी किस कि उसके होठों पर और कहा कि लाओ मैं तुम्हारा काम आसान कर देती हूँ . मैं उसके नीचे से निकली और अपनी panty जल्दी से उतार दी. पास पड़े बैग से कंडोम का packet निकाला और उसके लंड को हाथों me लेकर पहले प्यार से चूमा. फिर कंडोम पहना दिया. उसके चेहरे पर ख़ुशी देखने लायक थी. उसे कंडोम पहनाने के बाद मैं बिस्तर पर लेट गई और उसे अपने ऊपर लेटने के लिए कहा - अमित जानू मेरे ऊपर लेट जाओ ना. मेरी चूत के होठों पर अपने लंड को रख दो please . और मेरे बूब्स को कस कस के मसल डालो. वो जल्दी से मेरे ऊपर आ गया और मुझसे पूछा कि रेनू जान मैं तुम्हारे अन्दर आ जाऊं? मैंने उसके होठों को चूमा उसके हाथों को पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया और उसके लंड को अपनी चूत के होठों के बीच फंसा दिया. एक और किस किया उसके होठों पर और कहा कि अमित जानू मैं तुम्हारी हूँ, तुम जो भी करोगे मुझे मजा ही आयेगा. अब मेरे बूबे दबाओ ना जानू.

रेणू तुम बहुत अच्छी हो. तुम्हारे साथ मजा आयेगा. मैंने कहा अभी तुमने मजा लेना शुरू ही कहाँ किया है जानू. जल्दी जल्दी बेरहमी से मेरे बूब्स दबाओ ना. उसके हाथों को जो मेरे बूब्स के ऊपर ही थे, मैंने पकड़ कर अपने बूब्स पर दबाव बनाया. उसे यह बहुत अच्छा लगा. मेरी चूत के होठों पर उसने अपना भरी भरकम लंड का दबाव बढाया. उसका लंड मेरी चूत के होठों के बीच धंस गया. मुझे अच्छा लगा की हम दोनों इतने पास पास थे.  थोड़ी देर तो उसने लंड को मेरी चूत के होठों पर रगडा. फिर कमर उठाकर मेरी चूत में डालने की कोशिश करने लगा. मुझे उसे चिढाने में मजा आता था तो मैंने अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया. वो कोशिश करता कि मेरी चूत में लंड डाल सके और मैं उसकी कोशिश नाकाम कर देती. झुंझुलाकर उसने मेरे बूब्स को कस कस कर दबाना शुरू कर दिया और होठों को खूब जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया.अब मुझे भी लगा कि मुझे भी अमित को अच्छे से मजा देना चाहिए तो मैंने अपना हाथ नीचे ले
जाकर उसके लंड को पकड़कर अपनी चूत के दरवाजे पर रख दिया. उसकी आँखों में देखा और कहा कि बस अब अन्दर आ जाओ जानू. उसने अपने लंड को अन्दर की तरह धकेला, मैंने भी दर्द को सहते हुए अपने पाँव को चौड़ा किया ताकि मेरी चूत खुल सके और उसका मोटा लंड अन्दर जा सके. उसने जल्दी में मेरे दर्द की परवाह किये बिना अन्दर तक लंड घुसा दिया. मेरी चीख निकल गई, और आँखों से आंसू भी.  उसने थोड़ी सी देर रुकने की कोशिश की, फिर हलके हलके कमर हिलाने लगा. मुझे भी थोडा ठीक लगा और अब मैंने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया. वो जल्दी ही झड गया. और मेरे ऊपर थककर गिर गया. उसका लंड मुरझाकर बाहर निकल गया. मैं तो प्यासी ही रह गई. पर मुझे भरोसा था कि यह तो शुरुआत है. उसका भी पहली बार ही है, शाम तक वो कुछ ना कुछ तो ऐसा करेगा जिससे मैं संतुष्ट हो जाऊं. थोड़ी देर मेरे ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा वो और खुद को शांत करता रहा. मैं उसके सीने पर हाथ फिरती रही और बीच बीच में उसे चूमती रही. उसे धीरे से सीधा किया और उसके लंड से कंडोम उतारा और उसे बाँध कर रसोई में कचरे के डिब्बे में फ़ेंक दिया. 

वो बिस्तर में लेटा हुआ आराम कर रहा था और मैं अपने चूतड मटकाती हुई रूम में घूम रही थी.

मैंने अपना फिगर अभी तक नहीं बताया है. दोस्तों उस टाइम मैं 36C-28-38 हुआ करती थी. मैं उसे वापस जोश में लाना चाहती थी. वो सर के नीचे दो तकिये रखकर लेटा हुआ था और मेरी जवानी के जलवे देखे जा रहा था. मैं उसके पास जाकर बिस्तर पर चढ़ गई अपने दोनों पैर उसके दोनों तरफ रख दिए और उसके ऊपर झुक गई. अपने बूब्स इतने झुकाए कि उसके होठों पर मैं अपने निप्पल रगड़ने लगी. वो ललचाई नज़रों से तो पहले से ही देख रहा था. मैंने उसके हाथों के ऊपर अपने बूब्स रखे और कहा कि जान मैं बस तुम्हारी हूँ. तुम जो कहोगे मैं वही करूंगी. उसे भी बस यही चाहिए था. पूछने लगा कि क्या तुम मेरे लंड को अपने मुँह में लोगी? मैंने कहा कि तुम बस order करो. मैं तुम्हारी ग़ुलाम हूँ, बस जो कहोगे वैसे होता जायेगा. उसके पैर फैला दिए और मैं सरक कर उसकी जाँघों के बीच आ गई. बड़े ही प्यार से मैंने उसके लंड को अपने हाथों में पकड़ा, अपने होंठ झुकाए और उसके गीले सूपड़े को गुप्प से अपने मुँह के अन्दर डाल लिया. अपनी जीभ से अपने मुँह के अन्दर अन्दर ही मैंने उसके सूपड़े को अच्छे से साफ़ कर दिया. उसका लंड फिर से तन गया था. मैंने उसे अपने मुँह से बाहर निकाला और उसे किसी लोलीपोप की तरह चाटने लगी. उसे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरी चूत में भी आग लगी हुई थी पर मुझे पता था कि अमित का यह पहली बार था वो ज्यादा देर तक मेरे अन्दर नहीं रह सकता था. मैं उसके लंड को प्यार से पकड़ कर चूसती रही,  उसके लाल लाल सूपड़े को अच्छे से चाट चाट कर साफ़ कर दिया था मैंने. धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. और लंड को अन्दर तक मुँह में ले जाने लगी. वो परेशान होने लगा और अपनी कमर को ऊपर की ओर उठाने लगा. मैंने किसी तरह अपने लेफ्ट हाथ से उसकी कमर को नीचे रखने की कोशिश की. और उसके लंड को बुरी तरह चूसती रही. आखिरकार चार मिनट में उसने मेरे मुँह के अन्दर ही अपना वीर्य छोड़ दिया. मुझे अच्छा तो नहीं लग रहा था पर मैं सारा का सारा वीर्य गट गट करके पी गई. उसका लंड मुरझा गया था और वो थक भी गया था. मैंने अच्छे से उसके लंड को साफ़ किया अपनी जीभ से चाट चाट कर और फिर बिस्तर से उठ कर खड़ी हो गई. वो पूछने लगा कि कहा जा रही हो जान. मैंने कहा कि मैं पहले ब्रुश करना चाहती हूँ ताकि मैं तुम्हारे होठों को फिर से किस कर सकूं. जल्दी से बैग से ब्रुश निकल कर मैंने ब्रुश किया और फिर से अपने अमित के पास आकर खड़ी हो गई.

मेरे बूब्स बहुत गोरे हैं और निप्पल भूरे हैं. जब मैं अमित के बारे में सोचने से या उसके छूने से गरम हो जाती हूँ तो मेरे निप्पल कड़क हो जाते हैं. अभी वैसा ही हाल था मेरा, मेरे बूब्स भारी हो गए थे और निप्पल कड़क हो गए थे, एकदम तन से गए थे. उसके लंड में जितना कड़क पन था उतना ही मेरे निप्पल में भी था. दो दो बार लगातार अपना वीर्य निकलने से मेरा अमित थक गया था. मैंने सोच रखा था कि अब मैं काम करूंगी और उसे खुश करूंगी. उसके लंड को कुछ देर परेशान नहीं करूंगी. अभी बस आठ ही बजे थे. थोड़ी थोड़ी भूख लग आई थी. मेरे बैग में dairy milk chocolate रखी हुई थी, मैंने एक packet खोला और उसके ऊपर आकर लेट गई. मेरे बूब्स उसके सीने से चिपक गए.एक छोटा टुकड़ा तोड़ कर मैंने अपने होठों के बीच दबाया और उसका दूसरा सिरा अमित के होठों के बीच रखा, उसने वहां से खाना शुरू किया और मैंने यहाँ से. टुकड़ा छोटा सा ही था इसलिए जल्दी ही हमारे होंठ एक दूसरे से मिल गए.
पहली chocolate तो हमने बराबर बराबर से खाई, अगली chocolate में मैंने टुकड़ा तोड़ कर अपने मुँह में डाल लिया और आँखों से इशारा किया कि मेरे मुँह में से निकाल लो. अपने होंठ हलके से खोल लिए ताकि वो मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल कर chocolate खा सके. मुझे इसमें बड़ा मजा आ रहा था. काफी देर तक मैं उसे ऐसे ही chocolate  खिलाती रही. फिर मैंने अमित को लिटा दिया और अपने दोनों हाथ उसके सर के ऊपर कि ओर रख दिए, अपने शरीर को उठाया और घुटनो के बल हो गई. अपने बूब्स मैंने उसके मुँह के सामने झुका दिए ताकि वो मेरे कड़क बूब्स को झूलता हुआ देख सके. उसके चेहरे के भाव को देखने से मुझे एक सुकून सा मिल रहा था. आख़िरकार उसने कहा कि रेनू मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ. मैंने कहा जानू मैं भी तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ और तुम्हारे लिए सब कुछ करूंगी, जैसा तुम कहोगे मैं वैसा ही करूंगी. वो बोलने में बहुत शर्माता था. मुझे ही कहना पड़ता था. मैंने कहा जानू इन्हें हाथ लगाने का दिल कर रहा है ना? उसने हाँ में सर हिलाया. मैंने कहा कि तुम्हारा जो दिल करे वो करो ना अमित जानू, मैं तुम्हारी ही तो हूँ, उसने धीरे से अपने हाथों को मेरे बूब्स पर रखा और उन्हें झूलने से रोक दिया, मेरे कड़क बूब्स उसने दबाने शुरू कर दिए. मैंने वैसे ही उसके ऊपर अपने हाथों और पैरों से सहारे खड़ी रही और मजे लेती रही, उसके चेहरे पर आते हुए ख़ुशी के भावों को देख देख कर खुश होती रही. आखिर मेरा अमित मुझसे बहुत खुश जो था. बहुत देर दबा दबा कर खुश होने के बाद जब अमित ने अपने हाथ बूब्स पर से हटाये तो मैंने पूछा जानू  अब क्या इच्छा है आपकी?

इन्हें चूसने का दिल नहीं कर रहा? वो मुस्कुरा दिया और कहने लगा कि रेनू तुम बहुत अच्छी हो और तुम्हें सब पता है कि मेरे मन में क्या चल रहा है. मैंने कहा कि अमित तुम मेरे हो और मैं तुम्हारी हूँ. मेरा तो काम ही तुम्हारी सारी इछायें पूरी करना है. तुम उठो मत, मैं खुद इन्हें तुम्हारे होठों पर झुकाती हूँ. और अगले ही पल मैंने अपने बाएं बूब को उसके होठों पर रख दिया, निप्पल से उसके होठों को रगड़ने लगी और मिन्नत करने लगी कि अमित please  अपने होठों को खोलो न, मेरे बूब को अपने मुँह में जाने दो ना. वो हँस पड़ा और अपने मुँह को खोल कर मेरे बूब को अपने मुँह के अन्दर लेकर चूसने लगा. बड़ी ही शिद्दत से मेरे बूब को चूसता रहा. मैंने उसे ऐसा करते देख पूछा कि अमित मेरे बूब्स को चूसना तुम्हें इतना पसंद हैं? उसने आँखों से इशारा किया कि बहुत है, और आँखों से ही इशारा करते हुए पूछा कि मुझे कैसा लग रहा है. मैंने कहा कि अमित मेरे निप्पल और बूब्स अभी भी कड़क हैं, इसका मतलब मैं बता नहीं सकती कि मुझे कितना अच्छा लग रहा है. मन कर रहा है कि यह समय कभी ख़तम ना हो, तुम ऐसे ही लेते रहो और मैं तुमपर अपने बूब्स झुकाकर तुम्हें बूब्स चूसने दूँ.

मैं बहुत ही गोरी हूँ और ज़रा सी गर्मी से मैं लाल हो जाती हूँ. मौसम में तो हल्की हल्की सर्दी थी पर अमित ने मेरे दूधिया बूब्स को इतना दबाया था की मेरे बूब्स हल्के हल्के लाल हो गए थे. मैंने उससे पूछा की अभी भी भूख लगी है ना जानू? उसने कहा की हाँ लगी तो है. तो मैंने कहा कि फिर मुझे अपने अमित के लिए कुछ बनाने दो ना please. उठकर मैं kitchen की और चल दी, अमित भी मेरे पीछे पीछे चल पड़ा. पीछे पीछे चलते हुए उसने अपना सर मेरे बाएं कंधे पर रख रखा था और अपने हाथों को मेरे बूब्स पर. मैं भी enjoy कर रही थी इसलिए मैंने भी मना नहीं किया, हम दोनों बिना कपड़ो के ही थे और उसका लंड जो अभी खड़ा हो गया था मेरे चूतडों पर लग रहा था. kitchen में जाकर मैं देखने लगी कि जल्दी से जल्दी क्या बनाया जा सकता है. fridge में दूध था, maggi भी मिल गई. मैंने अमित से पूछा कि जानू maggi चलेगी? उसने हाँ में सर हिलाया और मेरे बूब्स सहलाने में व्यस्त हो गया.  मैंने गैस पर पानी चढ़ाया और गरम करने लगी, अमित से बातें करते करते पूछा, अमित जानू एक बात पूछूँ? उसने कहा पूछो ना जान. मैंने उसके दायें हाथ पर जो कि मेरे दायें बूब पर था, अपना हाथ रखते हुए पूछा मेरे बूब्स तुम्हें इतने पसंद हैं कि इनसे अपना हाथ हटाने का मन ही नहीं कर रहा है तुम्हारा. उसने कहा कि बहुत पसंद है जान, मेरा बस चले तो मैं कभी इनसे अपना हाथ ही ना हटाऊँ. मैंने कहा पहले maggi खा लो फिर मुझे आराम से खाना. maggi को दो bowls में लेकर हम टीवी रूम में आ गए. अमित सोफे पर बैठ गया, मेरा मन किया और मैं अपने दोनों पैर एक तरफ करके उसकी गोद में बैठ गई. उसका लंड मेरी जांघों के बीच मेरी चूत को छू रहा था. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मैंने bowl में से चम्मच से  अमित को धीरे धीरे maggi खिलाई, उसे कहा कि अमित मेरे प्यारे अमित, अपने हाथों को मेरे बूब्स पर से ना हटाओ, इन्हें मसलते रहो ना, मुझे अच्छा लगता है. बीच बीच में उसके होठों को चूमती जाती थी. मेरे मन में बहुत से ख्याल आ रहे थे, मैंने maggi का एक noodle अपने बूब पर डाल दिया और उसकी आँखों में देखकर कहा, जानू खाओ ना इसे, वो खुश हो गया, noodle खाने के लिए उसने मेरे बूब पर भी अच्छे से अपने होंठ लगाये. इस तरह से हमने साथ साथ आराम से मजे ले लेकर maggi खाई. खाने के बाद मैंने कहा कि अमित जानू मैं अभी यह bowl kitchen में रखकर आती हूँ, आप बेडरूम में चलिए ना. kitchen में जाकर मैंने पहले bowls धो दिए, फिर fridge में से दूध के ऊपर कि मलाई निकल कर अपने दोनों बूब्स पर लगे, दूध कि धाराएँ बूब्स से होती हुई मेरे सपाट पेट पर बहने लगी. मैंने जल्दी से अमित के पास बेडरूम में गई और पूछा - अमित जानू, थोड़ी मलाई खाओगे?

उसने खुश होते हुए कहा, जान यहाँ आकर लेट जाओ और मुझे खाने दो. बड़े ही आराम से अमित ने मेरे पेट पर से अपने होठों से चूमते हुए दूध साफ़ किया, फिर मेरे दूधिया बूब्स को अपना मुँह खोलकर अपने मुँह में भरने की कोशिश करने लगा. मैंने प्यार से उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा, जान मुँह में नहीं आ रहे ना यह? उसने निप्प्ले को मुँह में भरा और बूब को अन्दर भरने की पूरी कोशिश की, मुझे बहुत अच्छा लगा. मैं भी अपना सीना उठा कर उसके मुँह में भर देने की कोशिश करने लगी. थोड़ी देर बाद जब वो थक गया और मेरे ऊपर ही लेट गया तो मैंने बातें करते हुए उससे पूछा कि अमित जानू तुम्हारा मन भर गया कि नहीं? उसने कहा कि अभी कहाँ अभी तो बस शुरुआत हुई है और अपना हाथ नीचे लेजाकर मेरी चूत के ऊपर रख दिया. मैंने अपने पैरों को खोल दिया ताकि वो आराम से मेरी चूत को छू सके. आखिर वो मेरा अमित था, और मैं उसकी पूरी तरह से थी, आज और उसके बाद मैं उसकी ही रहना चाहती थी. मेरी चूत पर बाल थे, उनमे हाथ फिराते हुए कहने लगा कि जान यह बाल साफ़ करने होंगे, मैंने कहा मैं अगली बार आऊंगी तो साफ़ करवा कर ही आऊंगी. उसने कहा कि नहीं जान अभी कर लेते हैं. मैं पूछा कैसे करोगे? उसने कहा कि तुम्हारे पास hair remover cream होगी ना? मेरे बैग को खोलकर उसने cream निकाल ली और मेरे पैरों को चौड़ा करके आराम से मेरे बालों पर लगाने लगा. थोड़ी देर बाद हम दोनों बाथरूम में गए और उसे अच्छे से धो डाला, अब मेरी चूत पर एक भी बाल नहीं था और अमित कि ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. वो बार बार मेरी चूत पर अपने हाथ फिरा रहा था. मैं उससे कह रही थी कि जानू मैं तुम्हारी ही हूँ, और तुम जो कहोगे वैसा ही होगा. बाथरूम से वो मुझे अपनी गोद में उठाकर लाया और बिस्तर पर प्यार से लिटा दिया. मेरे पैरों को खोला और मेरी आँखों में अपनी आंखें डालकर पूछा, रेनू जान क्या मैं तुम्हारी चूत को होठों से चूम सकता हूँ? मैंने कहा कि अमित देखो यह तुम्हारे लंड के लिए ही बनी है. तुम्हारे होठों की जगह मेरी कमर से ऊपर है, मेरे होठों पर है, बूब्स पर है. पर अगर तुम इसपर अपने होठों को लगाना ही चाहते हो तो मैं मन कैसे कर सकती हूँ, मैं अब पूरी तरह से तुम्हारी हूँ और तुम्हारी ही रहूंगी. उसने मुस्कुरा कर मेरी चूत के होठों पर अपने होंठ रख दिए और पूरे जोश के साथ उन्हें चूमने लगा. मेरा मन कर रहा था कि अपने पैरों को कस लूं पर मेरा अमित इतना प्यार दे रहा था कि मैं उसे पूरा सहयोग देना चाहती थी, लेटे लेटे उसने मुझे इतना गरम कर दिया कि मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उससे कहा, जानू अब रुक जाओ ना, मेरा मन कर रहा है कि तुम अपना लंड मेरी चूत में डाल दो और मेरे बूब्स दबाओ. उसने कहा नहीं जान अभी नहीं अभी तो शुरुआत है. अभी तो मुझे अपनी जीभ अन्दर डालनी है. कहते ही उसने अपनी जीभ मेरी चूत के होठों के अन्दर सरका दी. अब उसने जीभ को घुमाना शुरू किया, अन्दर के हर हिस्से को टटोलने लगा. मुझे हँसी आ गई, मैंने पूछा क्या ढूँढ रहो हो जानू? उसने जीभ बाहर निकाली और कहा कि कुछ नहीं बस देख रहा था कि अन्दर क्या क्या है, बहुत सोफ्ट है सब कुछ, मैंने कहा सोफ्ट इसलिए है ताकि मेरे अमित को अन्दर आकर अच्छा लगे. अब जल्दी से मेरे अन्दर आ जाओ ना जानू? उसने जीभ बाहर निकल कर दिखाई और कहा इससे? मैंने कहा देखो अमित तुम जीभ से करोगे तो मेरे बूब्स दबाने होंगे तुम्हें, मेरा बहुत मन कर रहा है. उसने कहा कि ठीक है. मैंने फिर से अपने पैरों को खोला और उसके हाथों को अपने बूब्स पर रख दिया वो मेरी चूत को चूसने और चाटने में खो गया और मेरे बूब्स दबाता रहा, मैं अपने हाथों को उसके हाथों के ऊपर रख कर अपने बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबवाती रही. मैं बहुत ही खुश थी, इतना मज़ा आ रहा था मुझे. करीब आधे घंटे बाद मैं झड गई, अन्दर से रस का फव्वारा निकल पड़ा और चूत में से निकलने लगा, अमित को तो यही चाहिए था, उसने रस पीना शुरू कर दिया और चाट चाट कर सब साफ़ कर दिया.

मैं भी झड़ने से थक गई थी. अमित को कहा कि वो मेरे ऊपर लेट जाये और मेरे बूब्स से खेले. पर उसके इरादे कुछ और ही थे. उसका लंड खड़ा हो चुका था और उसे शांत करना बहुत जरूरी था.  उसने मुझे बिस्तर पर पेट के बल लेट जाने के लिए कहा, मैं करवट लेकर पेट के बल हो गई. अब वो मेरे गोरे गोरे चूतडों पर हाथ फेरने लगा. मैंने कहा अमित जानू क्या चाहते हो मन में क्या है. उसने कहा कि थोड़ी देर में पता चल जायेगा तुम्हें भी. फिर मेरा अमित मेरे चूतडों के बीच अपने हाथ फिरने लगा, मुझे तो जैसे चिंता ही नहीं थी किसी भी बात की. हाथ फिराते फिराते वो मेरी गांड के छेद पर भी हाथ फिराने लगा. फिर मेरे ऊपर आकर लेट गया. उसके लंड को मैं अपने चूतडों के बीच फँसा हुआ महसूस कर रही थी.

अपने हाथों को उसने मेरे बूब्स पर रखा और उन्हें दबोच लिया. मेरे दाहिने कान मेर हलके से कहा कि रेनू मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ. मैंने आन्हें भरते हुए कहा - अमित मैं पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी हूँ. मेरे साथ तुम जो भी करोगे मुझे अच्छा ही लगेगा. मुझे सिर्फ इतना बताओ कि मैं क्या करून जिससे तुम आराम से मजे ले लेकर मेरी गांड मार सको. वो बहुत ही खुश हो गया. कहने लगा कि बस अपने पैरो को चौड़ा करो जान और अपने हाथों को अपने चूतडों पर रखकर उन्हें बाहर कि और खींचो जिससे मैं अपना लंड आसानी से तुम्हारी गांड में घुसा सकूं. मैंने कहा अमित कंडोम तो पहन लो, उसने मना कर दिया, कहने लगा कि चूत में तो मैं इसलिए नहीं डाल सकता क्योंकि pregnant  होने का डर है, पर गांड में कैसा डर. मैंने कहा तो देर किस बात की है, जानू मैं अभी अपने चूतड खोल देती हूँ ताकि मेरा अमित आसानी से अपना लंड मेरे अन्दर डाल सके. और मैंने अपने चूतड अपने ही हाथों से खोल दिए और उसने लंड अन्दर घुसा दिया. पहले पहल बहुत दर्द हुआ पर बाद में मजा आने लगा. उसके नंगे लंड को मैं मजे से अपनी गांड में अन्दर बाहर होने में आनंद का अनुभव करने लगी. मेरी गांड मारते हुए उसने मेरे बूब्स बहुत ही बुरी तरह मसले. मुझे बड़ा मजा आया, जब वो शांत हुआ तो मेरे ऊपर ही पड़ा रहा. मैं ही उसे कहती रही कि जानू, बूब्स तो दबाओ. अब ना तो उससे बूब्स दबते बन रहे थे ना ही लंड से कुछ होने वाला था. वो अब बुरी तरह थक चुका था.  थोड़ी देर तक इस तरह मेरे ऊपर पड़े रहने के बाद हम दोनों बाथरूम में गए और उसके लंड को साबुन से धोया, उसने मेरी गांड भी साबुन से धोयी, फिर हमने साथ साथ नहाया, जिसमे उसने मेरे जिस्म के हर हिस्से पर साबुन लगाया. बाद में तौलिये से सुखाते समय उसने पूछा कि जान अब क्या इरादा है? मैंने कहा अमित मैं तुम्हारा लंड अपनी चूत में बिना कंडोम के लेना चाहती हूँ, periods के बाद चार दिन तक हम सेक्स कर सकते हैं बिना किसी परेशानी के. अगली बार जैसे ही periods होते हैं हम तैयार रहेंगे और तुम please अपना लंड मेरी चूत में बिना कंडोम के ही डालना. वो खुश हो गया और मुझे बहुत चूमा.

मेरी भूख बढ़ गई थी और मैं खुल कर चुदवाना चाहती थी. पर अमित से कैसे कहती. मैं बिस्तर पर लेटी थी और वो मेरे ऊपर लेटा हुआ था. मुझे बेतहाशा चूमे जा रहा था. मेरे होठों को बुरी तरह चूमे जा रहा था और मेरी चूत पर अपने लंड को घिसे जा रहा था. मैं बहुत ही खुश थी की मेरा अमित मेरे साथ वो कर रहा है जो मैं चाहती थी.

मेरे निप्पल कड़क हो गए थे. क्या करती वो मेरे होठों को चूम ही इतनी शिद्दत से रहा था. मैंने भी इस किस में उसका पूरा पूरा साथ दिया. उसके होठों को मैंने भी उतनी ही शिद्दत से चूमा. फिर उसने अपनी जीभ को मेरे होठों पर फिराना शुरू कर दिया और उन्हें गीला कर दिया. मुझे तो बड़ा मजा आ रहा था. इस वक़्त मैं उसके लिए कुछ भी करने को तैयार थी. अगर वो कहता की रेनू  तुम मुझे बिना कंडोम के लंड अन्दर डालने दो तो मैं उसके लिए भी तैयार हो जाती. पर ऐसा कुछ हुआ नहीं. उसने मेरे होठों को गीला करने के बाद कहा कि रेणू जान मुझे तुम्हारी जीभ चूसनी है. मैंने हलकी सी जीभ बाहर निकाल  ली. उसने अपने होठों के बीच मेरी जीभ को दबाया और चूसने में मगन हो गया. इतना प्यार पाकर तो मैं निहाल हो गई. मैंने पूरा मन बना लिया था कि आज के दिन मैं उसकी हर इच्छा पूरी करके रहूंगी और उसे इतना प्यार दूँगी कि वो कहीं और जाने की कभी भी ना सोचे. जीभ चूसने के बाद मैंने कहा कि जानू तुम बहुत थक गए हो, अब तुम लेट जाओ और मुझे सब करने दो. उसे लिटा कर मैं थोडा नीचे सरक कर उसके लंड के पास पहुँच gai, उसे प्यार से हाथों में लिया और उसकी स्किन पीछे खींचकर उसके सूप्ड़े को बाहर निकाल लिया और एक बंद होठों से किस किया. बड़ी ही तसल्ली से उसके सूप्ड़े को किस करती रही, साइड से, नीचे से, उसके सूप्ड़े के छेद को अपनी जीभ की टिप से छेड़ने की कोशिश करती रही, बाद में जल्दी से उसके सूप्ड़े को मुँह के अन्दर ले लिया. मुँह के अन्दर अपनी जीभ से उसके लंड को खूब गीला कर दिया, फिर बाहर निकाल कर उसे अच्छे से चाट चाट कर साफ़ किया और फिर दोबारा मुँह के अन्दर लेकर धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगी. होठों से होल्ले से उसके लंड को रगड़ना मुझे अच्छा लगने लगा था, बहुत देर तक मैं धीरे धीरे ही ऐसा करती रही, उसकी बेचैनी बढती गई और वो कमर उठाने लगा. मुझे समझ आ गया था की अब उससे सहा नहीं जा रहा है. मैंने लंड को बाहर निकला अपने मुँह से और अमित की आँखों में आंखें डालकर पूछा, अमित जानू मैं लेट जाती हूँ, तुम मेरे मुँह को चोद लो. मैंने अमित को पेट के बल लिटा दिया और खुद सरक कर उसके नीचे इस तरह आ गई कि मेरा मुँह उसके लंड के नीचे आ जाये. उसकी कमर को ऊपर उठाया और अपने दाहिने हाथ से उसके लंड को पकड़ कर अपने मुँह के अन्दर डाल दिया. अब मैंने अपने होठों से उसके लंड को कस लिया था और अमित अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगा और मेरे मुँह को धीरे धीरे चोदने लगा. मुझे मज़ा आने लगा कि मेरा अमित अब मेरे मुँह को छोड़ रहा है और अपना वीर्य मेरे मुँह में ही छोड़ेगा.  धीरे धीरे उसके धक्के जोर जोर से होने लगे, मुझे अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ कर धक्कों का जोर कम करना पड़ा. जब वो एकदम चरम सीमा पर पहुँच गया तो मेरे मुँह में गरम गरम वीर्य की एक धार छोड़ दी. मैंने भी उसे जल्दी जल्दी गटक लिया. अब वो थक गया था. लगातार मुझे बार बार चोद चोद कर पर उसका मन अभी भी नहीं भरा था. 

मैंने बातें शुरू की. अमित तुम खुश तो हो मेरे साथ, उसने मुझे प्यार से ऊपर की ओर खींचा और मेरे ऊपर लेट गया. मेरे होठों को चूमते हुए बोला कि जान तुम्हें पूरी तरह से मजा लेने के लिए कम से कम १० साल लगेंगे, आज तो बस पिछले २ घंटे ही हुए हैं. हम ऐसे ही बातें करते रहे. बीच बीच में मैं उसके होठों को चूमती रहती थी. उसके हाथों को उठाकर मैंने अपने बूब्स पर लगा लिया था और उसे कहा कि अमित इन्हें दबाते रहो ना जानू, मुझे अच्छा लगता है. उसने मुस्कुराकर उन्हें दबाना शुरू किया और कहा कि जान तुम बहुत बहुत बहुत अच्छी हो, तुम ना होती तो मैं यह सब नहीं कर पाता. मैंने कहा कि अमित मैं तुम्हारी ही तो हूँ, तुम जब कहोगे तब मैं तुम्हारे लिए आ जाया करूंगी और तुम्हारे लिए सब कुछ करने में मुझे अच्छा लगता है. तुम जब मेरे होठों को किस करते हो, मेरी जीभ को चूसते हो, मेरे बूब्स को मसलते हो, मेरे निप्पलों को मसलते हो, मेरी कमर को सहलाते हो, मेरे पेट पर किस करते हो, मेरे कानो को किस करते हो, मेरी चूत के होठों को किस करते हो या उनपर अपना लंड रगड़ते हो, मेरे चूतड दबाते हो मुझे बहुत बहुत बहुत अच्छा लगता है. ऐसा लगता है जैसे मैंने तुम्हारी हूँ. बातें करने में बड़ा मज़ा आ रहा था. काफी देर की चुदाई के बाद मेरा अमित थक भी गया था और अब मैं उसे थोडा आराम करने देना चाहती थी. 

उसका लंड अभी मुरझाया हुआ ही था. मैं अभी भी काफी गरम ही थी इसलिए अपने बूब्स दबवाने में उसकी मदद भी कर रही थी. हम बिस्तर में लेटे हुए थे और मैं उसके ऊपर झुकी हुई थी और अपने बूब्स मसलवा रही थी और बीच बीच में झुककर उसके होठों को किस करती जा रही थी. मैंने एक लम्बी किस की और उसके होठों को लगातार चूमा. फिर मैंने उसे प्यार से देखकर कहा कि अमित जानू मैं लेट जाना चाहती हूँ, उसने भी प्यार से कहा हाँ हाँ लेट जाओ रेनू, तुम कितनी देर से मुझे खुश करने में लगी हुई हो. थोडा सा आराम कर लो. मैंने उसकी तरफ पीठ करके लेटते हुए अपने आप को उससे सटा दिया. जान बूझकर अपने नंगे चूतडों को उसके लंड के ऊपर रखकर दबा दिया. उसके बाएं हाथ को आगे की और लिया और अपने बाएं बूब पर रख दिया और कहा कि जानू तुम इसे दबाते रहो ना, मुझे अच्छा लगता है और उसका दायाँ हाथ उठाकर अपनी कमर पर रख दिया और कहा इसे सहलाओ ना मेरे अमित. अमित को क्या चाहिए था वो तो बहुत ही खुश था. उसकी बरसों की तमन्ना आज पूरी हो रही थी वो भी इस तरह कि मैं उससे सब कुछ करा रही थी. हम फिर से बातें करने लगे. मैंने ही शुरू किया. पूछा - अमित तुम्हें मुझमे सबसे ज्यादा अच्छा क्या लगा?

उसने तुँरंत कहा तुम्हारे नरम नरम होंठ. मैंने पूछा और? उसने मेरे बूब्स दबाते हुए कहा कि तुम्हारे बूब्स जान. मैंने कहा तो मज़े लेकर दबाओ, सहलाओ और मसालों यह तुम्हारे लिए ही हैं. सुनो तुम्हें बूब्स सहलाने में मज़ा आता है, दबाने में या मसलने में? सच सच बताना मेरे अमित. उसने कहा कि मसलने में. मैंने उसके हाथों के ऊपर दबाव बनाते हुए कहा कि यही बात तो तुम्हारी मुझे पसंद है कि तुम सच बोलते हो और जो दिल में होता है बोल देते हो. मसल डालो ना मेरे बूब्स को.  उसके दोनों हाथों को अपने बूब्स पर रखते हुए मैंने उन्हें मसलने के लिए request की. उसने कहा कि रेनू जान मैं तुम्हारा हूँ और मैं इन्हें ऐसे ही मसलते रहूँगा. उसने बड़ी जोर से मसलना शुरू किया, मेरी तो सिस्कारियां निकल गई. पर वो ना रुका. मेरी आँखों से आंसू निकल पड़े और उसकी बांह पर गिरे तब जाकर कहीं उसे समझ आया कि उसने कितनी बेरहमी से मसला है. तुरंत उठकर बैठ गया और मेरे बूब्स को ध्यान से देखने लगा. झुककर मेरे होठों पर किस किया और बोला - जान मुझे माफ़ कर दो, जोश में मैंने ध्यान नहीं दिया, तुम्हें दर्द हो रहा था तो बता देती या कोई इशारा ही कर देती मैं ज्यादा नहीं मसलता. मैंने कहा अमित जानू तुम मेरे हो ना. उसने कहा हाँ हूँ मैं तुम्हारा पर यह...

मैंने कह तुम्हें मज़ा आया कि नहीं? उसने कहा रेनू मुझे मज़ा तो आया पर यह... मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और काफी लम्बा किस किया और कहा जानू तुम्हें अच्छा लगा तो मुझे भी अच्छा लगा. तुम्हारे लिए मैं कितने भी दर्द सह लूंगी. उसने ध्यान से देखते हुए कहा कि निशान तो नहीं पड़े हैं. मैंने कहा कि अगर पड़ भी जाएँ तो मुझे कोई ग़म नहीं होगा. बस मेरे अमित को पूरा मज़ा मिलना चाहिए. अपने हाथों से उसके हाथों को फिर से उठाकर अपने बूब्स पर रखा और उसकी तरफ पीठ करके लेट गई और कहा फिर से दबाओ ना जानू. इस बार अमित ने हलके हलके दबाना शुरू किया. मैंने नाराज़ होते हुए कहा कि जोर से दबाओ ना मुझे मज़ा आता है. उसने जोर से दबाना शुरू किया, उसका लंड तो खड़ा हो ही चुका था. मेरे चूतडों के बीच फंसा हुआ था. मैंने कहा जानू तुम्हारा मन कर रहा है ना? अपने एक हाथ को पीछे ले गई और उसके लंड को सहलाने लगी. उसे मज़ा आ रहा था. मैंने कहा जानू अन्दर आ जाओ ना. उसने बूब्स कस के दबाये और कहा कि मैं तो चाहता हूँ जल्दी से अन्दर आ जाना पर पहले कंडोम पहना दो तुम. मैंने कहा तुम मेरे बूब्स तो छोड़ो पहले. उसने एक बार और कस के दबाये और छोड़ दिया. मैंने घूमकर उसे देखा और कहा तुम बहुत शरारती हो. मैंने कहीं भागी जा रही हूँ क्या? बिस्तर से उतारकर मैंने साइड टेबल से कंडोम का पैकट खोला और कंडोम लेकर अमित की तरह आई. उससे मिन्नत की कि अमित जानू अपने पैर खोल लो ना. उसने अपने पैरों को खोल लिया और मैंने उसके लंड को अपने दाहिने हाथ में पकड़ा और बंद होठों से एक लम्बा किस उसके सूप्ड़े पर रख दिया.

उसके लंड में कड़क बढती जा रही थी. मैंने लंड की स्किन को पीछे खींचा और अपने होठों को लंड पर सरका दिया, उसका पूरा लंड मेरे मुंह के अन्दर चला गया गले तक. उसके चेहरे पर चमक आ गई थी. फिर मैंने लंड को मुंह से बहार निकला और खूब चूमा और जल्दी जल्दी मुंह के अन्दर बाहर किया. फिर जल्दी से कंडोम पहना दिया. वो कहने लगा कि तुम्हारी यही बात मुझे बहुत पसंद आई कि तुमने अपना सब कुछ कितने आराम से मेरे नाम कर दिया है. मैंने कहा सब कुछ तुम्हारा ही है, तुम इस्तेमाल करोगे तो मुझे अच्छा ही लगेगा. अच्छा अब बातें बंद अब काम शुरू. और मैं बिस्तर पर आ गई. उसकी तरह मुंह करके बैठ गई. मैं कहा अमित बुरा ना मानो तो एक बात कहूं? उसने कहा कहो ना रेनू, खुलकर कहो. मैंने कहा मैं चाहती हूँ कि इस बार जब तुम मेरे अन्दर आओ तो मेरे बूब्स अच्छे से दबाते रहो. मैं अपनी पीठ तुम्हारी और करके लेट जाती हूँ और तुम पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डालो, अपने हाथ मेरे बूब्स से एक पल के लिए भी ना हटाना. उसने मुस्कुरा कर कहा कि ऐसा ही होगा.

मैं अपनी बायीं करवट लेकर लेट गई और अपने पैर खोल लिए. अमित ठीक मेरे पीछे लेट गया और अपने बाएं हाथ को मेरे बाएं बूब पर मेरी बॉडी के नीचे से ले गया. दायें हाथ से मेरे दायें बूब को पकड़ लिया और होठों को मेरी गर्दन पर रख दिया और रगड़ने लगा. अपने दायें पैर को मेरे दायें पैर के ऊपर रखा और अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर रख दिया. मैंने कहा जानू अब अपने मन की करो. कुछ ऐसा करो कि तुम्हें बहुत मज़ा आये, बस मेरे लिए मेरे बूब्स को दबाते रहो. उसने बूब्स दबाने शुरू किये और अपने होठों को मेरी गर्दन पर रगड़ना शुरू किया, अपने लंड को आगे बढाकर मेरी चूत के अन्दर ले जाकर बहार निकलने लगा. मैंने कहा अमित जानू तुम्हें तडपाने में मज़ा आता है ना? तडपा लो मुझे वो लंड अन्दर डालकर फिर से बहार निकाल लेता था. बूब्स कस कस कर दबाये जा रहा था और लंड को अन्दर की और धकेलते जा रहा था. थोड़ी देर में उसने लंड अच्छे से अन्दर घुसा दिया और मैंने भी अपने पैर ज्यादा खोल लिए. अब वो आराम से मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लगा. बूब्स इतनी बुरी तरह दबा रहा था जैसे दुश्मनी हो उनसे. मुझे तो मज़ा आ रहा था. जब मुझे लगा कि अब थोड़ी ही देर में वो छूट जायेगा तो मैंने कहा अमित सुनो अब चाहे मेरे आंसूं निकाल जाएँ पर मेरे बूब्स को पूरी ताकत लगाकर दबाओ मैं देखना चाहती हूँ कि तुम कितनी ताकत से मेरे बूब्स मसल सकते हो. उसने बुरी तरह मसलना शुरू किया और मेरे बूब्स ऐसे मसले कि मेरे आंसूं निकाल पड़े. सिस्कारियां शुरू हो गई पर वो ना रुका. जब वो छूट गया तब जाकर उसकी पकड़ बूब्स पर ढीली हुई. मैंने अपने देने हाथ को उसके बूब पर रखते हुए कहा जानू दबाते रहो ना. उसने फिर से दबाना शुरू कर दिया. हम फिर से बातें करने लगे. मैंने कहा तुम्हें अच्छा लगा मेरे बूब्स दबाकर? उसने कहा बहुत बहुत बहुत अच्छा लगा मेरी जान. तुम इतने प्यार से चुदवाती हो कि मज़ा आ जाता है.

मैंने कहा तुम थक गए ना. मैं कितनी मेहनत कराती हूँ तुमसे. तुम हो जो इतना प्यार करते हो मुझसे. अच्छा अब मेरे निप्पल दबाओ ना, इन्हें भी मसलो. तुम्हारे हाथ दर्द कर रहे होंगे, थोडा अपनी उँगलियों को भी खेलो. और उसने अपनी उँगलियों से मेरे निप्पलों को मसलना छेड़ना शुरू कर दिया. मज़ा आ गया. मैं बहुत ही खुश थी. मैंने कहा अमित अब मैं कभी भी कहीं भी तुम बुलाओगे तुम्हारे लिए जरूर आऊंगी. और जल्दी ही तुम बिना कंडोम के मेरे अन्दर आ सकोगे. उसने खुश होकर कहा जान, मैं तुमसे बहुत खुश हूँ और निप्पलों को जोर से मसल दिया.











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