Sunday, March 8, 2015

Fentency मर्ज बढता ही गया--1

Fentency

 मर्ज बढता ही गया--1

उस गाँव की बगिया में एक गुलाब खिल गया था रश्मि नाम था । दिखने में
कामदेव की पत्नी रत्ती के सामान थी ।
चार उंगल का ललाट , हिरनी के जैसे आँखे, तीखा नाक , लाल सुर्ख ओठ, सुराही
जैसे गर्दन, सांचे में ढले उन्नत वक्ष , पतली कमर, गहरी नाभि, कमल दंड
जैसी बाहे, गोल नितंभ, भरी हुई चिकनी जांघे । चलती थी तो गाँव के लोंडे
तो क्या बूढ़े बूढों की भी साँसे एक बार तो रुक जाया करती थी ।
अपनी जवानी का दंभ था उसको क्यों की आस पास के गाँव में उसके जैसा सुन्दर
, रूपवान, और कामुक कोई और न था ।
सुन्दर होना भी एक अभिशाप हो सकता हे । दिन पर दिन बीत रहे थे । रश्मि के
माँ बाप को रश्मि की साडी की चिंता खाए जा रह थी । गाँव में कोई आमदनी न
देख कर रश्मि के बाप ने सोचा क्यू न शहर जा के कोई काम धंधा किया जाये ।
ताकि रश्मि की साडी किसी अच्छे घर में कर सकू । इन्ही ख्यालों के साथ
रश्मि का बाप एक दिन शहर की और चला गया । अब घर में सिर्फ रश्मि और उसकी
माँ ही रह गए थे तीसरा कोई सदस्य नहीं था ।
माँ दिन थके तक जमींदार के खेत पे काम करने के लिए चले जाया करती थी पीछे
रश्मि अकेले ही घर पे रहा करती थी । मौका पा के इन्द्र रश्मि के घर आ
जाता था । इन्द्र के मन में तो पहले से ही चोर बसा हुआ था । इन्द्र की
नियत थी की वो रश्मि के साथ खेले पर वो एक अलग हे खेल खेलना चाहता था जो
योवन में खेला जाता हे । बातों बातों में वो रश्मि को छु तो लेता था
परन्तु कभी उसको दबोचने की हिम्मत नहीं कर पाया था ।
इन्द्र का दोस्त था सुखराम वो शहर में काम किया करता था जब भी वो गाँव
आता तो वो और इन्द्र दोनों अपना समय साथ साथ हे बिताते थे । एक दिन
इन्द्र में अपने मन की सारी बात सुखराम को बता दी ।सुखराम भी चाहता था की
क्यू ना में भी इस रश्मि के मजे ले लू । उसने कहा इन्द्र मेरे पास एक
तरकीब हे अगर काम कर गई तो समझ ले तेरा काम हो जायेगा । इन्द्र बोला बता
ना क्या तरकीब हे । सुखराम अपने साथ शहर से सेक्स की एक किताब लाया था
उसने वो किताब इन्द्र को दे और बोला अगर ये किताब एक बार तो रश्मि की
देखा दे तो सायद तेरा काम हो जायेगा परन्तु एक शर्त हे । में भी एक बात
रश्मि को चोदना चाहता हु । वो दोनों पक्के दोस्त थे इसलिए इन्द्र उसको ना
नहीं कह सका और आगे की योगना सुरु की ।
अगले दिन इन्द्र उस किताब को ले के रश्मि के घर जा पहुंचा । रश्मि घर पे
अकेली ही थी । उसने कहा रश्मि में तेरे लिए कुछ लेके आया हु देखेगी क्या
। रश्मि बोली देखा ना क्या लाया हे । तो इन्द्र बोला पहले ये वादा कर
किसी को कुछ नहीं कहेगी कुछ भी नहीं बताएगी । उसने कहा ठीक हा बा बा अब
बता ना क्या लाया हे । इन्द्र ने अपनी बनियान में छिपी किताब बहार निकली
और रश्मि के आगे कर दी । रश्मि ने जैसे ही उसका पन्ना पलता उसका हाथ
कांपने लगा परन्तु उसके हाथ से वो किताब नहीं छूटी । वो पन्ने पलट पलट कर
किताब में नंगी तस्वीरों को देख रही थी । वो इन्हें देखने में इतनी मशगुल
हो गई थी की उसको ध्यान ही नहीं रहा की इन्द्र भी उसके पास ही खड़ा हे ।
किताब देखते देखते अनजाने में उसका हाथ अपने स्तन पर चला गया और एक हल्का
सा दबाव उसने दिया । उसके मुह से एक सिसकारी निकल गई । अचानक उसको होश
आया उसने देखा इन्द्र उसके पास हे खड़ा हे । उसने तुरंत अपना हाथ हटा लिया
। रश्मि इन्द्र को किताब देते हुए बोली इन्द्र माँ आने वाली हे अभी तुम
जाओ । आज रश्मि को कुछ अजीब सा परन्तु मन में एक उमंग से महसूस हो रही थी
। शायद आज उसको अपने जवान हो जाने का एहसास हो रहा था । इन्द्र वह से चला
गया ।

इन्द्र के चले जाने के बाद रश्मि ना जाने किन ख्यालों में खो गई । उसको
बैचैनी सी महसूस हो रही थी । अभी भी उसकी सांसें तेज थी । माँ के आ जाने
के बाद रश्मि ने माँ को खाना खिलाया फिर दोनों छत पे जा के खाट पे लेट गई
। रश्मि लेटे हुए थी पर आँखों से नींद कोसों दूर थी । रह रह कर उसकी
आँखों के सामने उस किताब की तस्वीरे आ रही थी । खाट पे वो नागिन की तरह
अंगडाई ले रही थी । उसने महसूस किया उसका सरीर अकड़ रहा था । पर मन में
एक अजीब सी कसमसाहट थी । अनजाने में उसका हाथ उसकी चूत पर चला गया । धीरे
धीरे वो अपनी चूत को रगड़ रही थी । थोड़ी सी रगदन के बाद ही उसकी चूत ने
पानी छोड़ दिया । वो निढाल हो गई अपनी आँखों को बंद कर वो एक अजीब सा
सुकून महसूस कर रही थी । आज रात उसको बहुत हे गहरी नीद आई ।
अगले दिन माँ के खेत चले जाने के बाद रश्मि ने अपना घर का सारा काम ख़तम
किया । नहा धो कर वो तैयार हो गई । नहाते समय आज उसने पहली बार अपने सरीर
को बड़े घोर से देखा । उसकी इच्छा हो रही थी की कोई आके अभी मसल दे
परन्तु अपने हाथों से थोडा सा सुकून पा के वो तैयार हो गई । रश्मि घर में
अकेली थी इसी बीच इन्द्र वह आ गया । इन्द्र को देखते ही उसकी आँखों में
चमक आ गई । आज वो उसको अलग हे नजरों से देख रही थी । इन्द्र ने हिम्मत की
और जा क रश्मि का हाथ पकड़ लिया । रश्मि ने इसका कोई विरोध नहीं किया ।
अवसर पा के इन्द्र ने रश्मि को गले से लगा लिया । रश्मि ने भी इन्द्र को
कस कर अपनी बाहों में ले लिया । उसके स्तन इन्द्र के सिने से टकरा गए ।
इन्द्र उसको बाहों में लिए हुए कमरे में ले गया । गले से नागपाश की तरह
लिप्त इन्द्र रश्मि की गर्दन पे अपने होठों से चुम्बन ले रहा था । रश्मि
हाथ भी कभी इन्द्र के बालों में तो कभी उसकी कमर पे रेंग रहा था । इन्द्र
धेरे से अपना हाथ रश्मि के स्तन पे रखा और उसको हलके से दबाया सचमुच उसके
अनछुए स्तन बहुत ही कठोर थे । जैसे ही इन्द्र ने स्तन दबाया रश्मि के मुह
से सिसकारी निकल गई । उसने और कस कर इन्द्र को जकड लिया । इन्द्र इसी
अवसर की प्रतीक्षा में था उसने रश्मि की अंगिया में हाथ दाल कर उसके स्तन
को दबाया । गोल और मांसल तथा चिकने स्तन पे हाथ जाते हे इन्द्र का लंड
गैंडे के सींग की तरह खड़ा हो गया । उसने रश्मि की अंगिया की डोरी को खोल
दिया और उतार के फेंक दिया । उसके गोल गोल और सुड़ोल स्तन को देख कर
इन्द्र के सब्र का बाँध टूट गया और एक भूखे भेडिये की तरह उन पर हमला कर
दिया । वो एक स्तन को मुह में चूस रहा था तो दुसरे को अपने हाथ से मसल
रहा था । पुरे कमरे में रश्मि की सिसकारी गूंज रही थी । काफी देर तक उन
दोनों का ये खेल चलता रहा । अब इन्द्र का हाथ रश्मि के नितम्बों पे चला
गया उसकी गोलाइयो को महसूस करते हे इन्द्र और जोश में आ गया । उसने आव
देखा न ताव और तुरंत रश्मि के घाघरे का नाडा खोल दिया । रश्मि का घाघरा
सरसराता हुआ जमीन पे गिर गया । उसके गदराये हुए जिस्म को देख कर इन्द्र
पागल हुआ जा रहा था उधर रश्मि भी आज अपने योवन लुटाने के लिए तैयार थी ।
इन्द्र ने अब उसको पलंग पे लिटा दिया और अपने कपडे उतारने लगा । इन्द्र
का लंड उसकी अंडरवियर से बाहर आने को तत्पर था । रश्मि से रहा नहीं गया
और उसने इन्द्र की अंडरवियर को उतार दिया । जैसे ही उसने अंडरवियर को
निचे खिंचा इन्द्र का लंड फनफनाता हुआ बहार आ गया इसे देख कर रश्मि एक
बार तो सहम गई । पर हिम्मत कर के उसने उसको हाथ में लिया रश्मि के कोमल
हाथ लगते ही इन्द्र के लंड से पानी की बुँदे टपकने लगी । रश्मि अब इन्द्र
के लंड को धीरे धीरे आगे पीछे कर रही थी इन्द्र के मुह से सिस्कारिया
निकल रही थी । थोड़ी देर के बाद ही इन्द्र रश्मि के ऊपर आ गया और उसको
ताबड़तोड़ चूमने लगा पहले होठों को चुन्सा फिर उसके स्तन को । ऐसा करते
करते वो रश्मि की चूत पे आ गया । रश्मि की चूत पे बहुत ही कम पर मुलायम
बाल थे । इन्द्र ने उनकी जाँघों को फैला दिया और अपना मुह रश्मि की चूत
के पास ले गया । रश्मि की चूत से बहुत ही मादक खुसबू आ रही थी इन्द्र ने
अपनी जीभ जैसे ही रश्मि की चूत पे लगाईं उसे लगा मानो उसकी जीभ जल जाएगी
। रश्मि की चूत में अंगारे दाहक रहे थे । इन्द्र जैसे ही रश्मि की चूत को
चाटने लगा रश्मि की चूत से पानी की एक धार छुट गई । इन्द्र फिर भी अपने
काम में लगा हुआ था वो लगातार उसकी चूत को चाट रहा था अब तो रश्मि का
बुरा हाल हो गया था । उसको समः नहीं आ रहा था की उसकी ये आग कैसे शांत
होगी ।
अब इन्द्र अपने लोहे की राड जैसे लंड को और ज्यादा आजादी नहीं देना चाहता
था वो चाहता था की जल्दी से उसका लंड रश्मि की चूत में कैद हो जाये ।
इन्द्र ने अपने लंड को सहलाया और उसको रश्मि की चूत के मुहाने पे टिका
दिया ।

जैसे ही इन्द्र का लंड रश्मि की चूत के मुहाने पे लगा मानो उसका लंड उसकी
चूत से चिपक गया हो । इन्द्र को लगा जैसे वो उससे कभी अलग ही नहीं हो
पायेगा । अपने को थोडा सा संभाल कर इन्द्र ने रश्मि की चूत पे थोडा सा
दबाव डाला । इन्द्र के लंड का सुपाडा थोडा अन्दर चला गया की रश्मि के मुह
से आह निकल गई उसका चेहरा लाल हो गया । एक मिट्ठा सा दर्द उसके जहन में
दौड़ गया । उसका जिस्म बिना पानी की मछली की तरह तड़फ रहा था । अपनी
टांगो की हवा में उछालते हुए वो इन्द्र के जाल से निकलने का प्रयास कर
रही थी परन्तु अब से मछली उस जाल से बाहर आने में नाकाम रही । इन्द्र ने
थोड़ी और ताकत लगाईं और एक जोर का झटका दिया उसका लंड रश्मि की चूत की
दिवार को फाड़ता हुआ आधा अन्दर चला गया । रश्मि की चूत से खून और आँखों
से आंसू एक साथ बह गए । उसकी आँखों में ऐसी भावना थी मानो वो इन्द्र से
कह रही हो की इन्द्र मुझसे गलती हो गई मुझे माफ़ कर दो परन्तु उसके मुह
से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था । इन्द्र अब धीरे धीरे धक्के लगा रहा था
har धक्के पे रश्मि की सिसकारी बढती जा रही थी । रश्मि की सिस्कारियों से
इन्द्र का जोश और दुगुना होता जा रहा था । वो और जोर से धक्के लगाने लगा
। अब तो रश्मि की सिस्कारियों की जगह उसकी आहो ने ले ली थी । आधे घंटे की
चुदाई के baad इन्द्र saant हो गया और निढाल हो के रश्मि पे ही गिर पड़ा
। दोनों हे पसीने से तर बतर हो गए थे उन दोनों को होश भी नहीं था की उन
दोनों के इस खेल को कमरे की खिड़की से भी कोई देख रहा हे ।

तभी रश्मि की निगाहें खुली खिड़की की तरफ गई बहार खड़े व्यक्ति को देख कर
रश्मि सकपका गई । उसकी हालत काटो तो खून नहीं जैसी थी । इस सारी योजना का
जो सूत्रधार था सुखराम वो बहार से इस सारे खेल को देख रहा था । खिड़की से
इन्द्र और रश्मि की जवानी का खेल देखते देखते सुखराम भी अपने लंड को मसल
रहा था । सुखराम रश्मि के गदराये जिस्म को देख कर अपनी सुध खो बैठा ।
रश्मि सहम गई थी की सायद सुखराम ये सारी बात गाँव वालो को बता देगा उसके
मन में एक डर बैठ गया था उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे ।
परन्तु औरत आदमी को वश में करना खूब जानती हे । वो सुखराम के और देख कर
मुस्कुरा दी । सुखराम ने सोचा अब उसके लिए भी रास्ता साफ़ हो गया हे उसने
बिना देरी किये रश्मि के कमरे में आ गया और इन्द्र को कहा इन्द्र अब तू
घर की चौखट पे जा यदि कोई आ जाए तो मुझको इशारा कर देना । इन्द्र वह से
चला गया । रश्मि के बदन को देख कर सुखराम अपने आपे से बहार हो गया उसने
रश्मि को पलंग से उठाया और उसको बेतहासा चूमने लगा एक बार और रश्मि की आग
भड़क उठी । वो भी सुखराम को चूमने लगी । क्रमशः........................







Tags = Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |

No comments:

Raj-Sharma-Stories.com

हिन्दी मैं मस्त कहानियाँ Headline Animator