Sunday, March 8, 2015

Fentency जुए की लत--7

Fentency
 जुए की लत--7

  हर्षित : "पर ये यहाँ आये कैसे ...अभी आधा घंटा पहले तक तो भाभी ने पहने हुए थे ..''

सभी सोचने लगे ...

हर्षित : "यानि भाभी यहाँ आयी थी ...और अपने कपडे उतार कर ..वो ...वो ...पानी के अंदर ...''

और सभी घबरा कर पानी कि तरफ देखने लगे ..उन्हें लगा कि दिव्या पानी में डूब गयी है ..

हर्षित ने आनन् फानन में अपने कपडे उतारे और पानी के अंदर कूद गया , दिव्या को ढूंढने के लिए ..

थापा पीछे जंगल कि तरफ भागा , उसे लगा कि कहीं वो वहाँ कि तरफ न चली गयी हो ..और राजेश अपना सर पकड़ कर इधर उधर देखते हुए बड़बड़ाने लगा : "साला ...सारा नशा उतर गया ...''

पानी के अंदर इधर उधर ढूंढने के बाद जैसे ही हर्षित उस चट्टान कि तरफ जाने लगा तो दिव्या को लगा कि अब बचना बेकार है ..पर तभी उसके दिमाग के अंदर एक आईडिया आया और वो चट्टान के ऊपर उलटी लेट गयी ..और बेहोशी का नाटक करने लगी ..

जैसे ही हर्षित तैरता हुआ वहाँ पहुंचा वो जोर से चिल्लाया : "मिल गयी ....यहाँ है दिव्या .."

और जैसे ही राजेश ने ये सुना वो भागता हुआ आया और पानी के अंदर कूद गया वो भी ..और वहाँ पहुंचकर उसकी हालत खराब हो गयी ..दिव्या पूरी नंगी पड़ी हुई थी वहाँ ..

उसने होश सम्भालते हुए हर्षित कि मदद कि और दोनों ने दिव्या के नंगे जिस्म को पकड़कर तैरते हुए बाहर निकाल लिया ...

तब तक थापा भी वापिस आ गया ...और आते ही उसने देखा कि दिव्या का नंगा जिस्म दोनों के बीच में पड़ा हुआ है ..

थापा : "ओह ...तेरी माँ कि ...चूत साले ....ये तो सच में दिव्या भाभी है ...और वो भी पूरी नंगी ...''

इतना कहते हुए उसने अपना हाथ आगे किया और उसकी ब्रैस्ट को पकड़ कर हिला दिया ..

हर्षित ने उसके हाथ को झटका : "साले ...क्या कर रहा है ...कोई गलत हरकत मत कर ...समझा ...लगता है तैरना नहीं आता था ..बेहोश हो गयी है ..''

वो तीनो उसके नंगे जिस्म को ऊपर से नीचे तक घूर - २ कर देख रहे थे ..पर उनके संस्कार कुछ भी करने कि इजाजत नहीं दे रहे थे . एक तो वो उनके दोस्त कि बीबी और ऊपर से बेहोश भी थी ..इसलिए वो उसका गलत फायेदा नहीं उठाना चाहते थे ..

पर लंड के पास दिमाग नहीं होता ..वो ये सब नहीं सोचता ..

दिव्या का नंगा बदन देखकर तीनों का लंड पूरी तरह से टन्ना चूका था ..

तीनों को दिव्या बेहोशी कि हालत में एक नहीं तीन दिख रही थी ..हर एक लिए एक दिव्या ..

थापा ने हर्षित कि तरफ देखा और बोला : "भाई ...अब क्या करे ...मेरे से तो सब्र नहीं हो रहा ये सब देखकर ...ये देख ..''

उसने अपने लंड कि तरफ इशारा किया ..सभी वहाँ देखने लगे ..और दिव्या ने भी थोड़ी सी आँख खोलकर वहाँ देखा ..सच में बुरी तरह से हिनहिना रहा था सभी का घोडा ..

और ये सब देखकर उसकी चूत के अंदर से भी एक गर्म पानी कि धार बाहर निकल पड़ी ..

हर्षित अब तक समझ नहीं पा रहा था कि करे तो क्या करे ..क्योंकि मन तो उसका भी कर रहा था ..फिर वो सभी को आदेश देता हुआ बोला : "देखो भाई ...इस वक़्त भाभी का फायेदा उठाना तो बुरी बात है ..पर जब ये इतना खुल कर नहाने के लिए यहाँ नंगी जा सकती है तो थोडा बहुत तो हम लोग भी कर सकते हैं ...पर ज्यादा कुछ करने कि मत सोचना ...ठीक है ..''

सभी ने हाँ में सर हिला कर उसकी बात मान ली ...थापा ने मन ही मन कहा कुछ ना होने से कुछ होना बेहतर है ..'


 दिव्या के पुरे शरीर में चींटियाँ सी रेंग रही थी ..हलकी हवा चलने से उसका शरीर भी कांप रहा था ..जिसे देखकर थापा बोला : "यार ...लगता है भाभी को ठण्ड लग गयी है ..देखो तो कैसे कांप रहा है इनका शरीर ..''

और ये कहते -२ उसने अपने दोनों हाथों को उसके पेट पर रख दिया और ऐसे घिसने लगा जैसे जिन्न निकालने के लिए चिराग को घिस रहा हो ..और घिसाई करते - २ उसके हाथ ऊपर खिसक आये और उसने बड़े - २ हाथों से उसकी पहाड़ी चोटियों कि बर्फ अपने हाथों से तराशनी शुरू कर दी ..

सभी अपने मुंह से लार टपकाए ये सब देख रहे थे ..

और फिर धीरे - २ राजेश के हाथ भी सरकते हुए उसकी जाँघों पर आये और वो उन्हें दबाने लगा ..अब बेचारा हर्षित भी क्या करता ..उसने भी अपने हाथों से उसकी छातियों कि मालिश शुरू कर दी ..

अब दिव्या के पुरे शरीर पर 6 हाथ और तीस उँगलियाँ फिसल रही थी ..जो उसे मसल रही थी ..कचोट रही थी ..नोच रही थी ..और उसके शरीर को गरमी प्रदान कर रहे थे .उनके हिसाब से तो दिव्या बेहोश थी ..पर वो शायद ये नहीं जानते थे कि औरत चाहे जितनी मर्जी गहरी नींद या बेहोशी में हो, उसके शरीर के साथ क्या हो रहा है वो सब उसे पता रहता है .

दिव्या तो वैसे खुद ही यही चाहती थी ..पर बेहोशी का नाटक करते हुए वो सोच रही थी कि उसकी मर्यादा अभी तक बची हुई है क्योंकि वो अपनी तरफ से तो ये सब नहीं कर रही ..

और यही सोचकर वो बस मजे लेने के लिए बेहोशी का नाटक करती रही ताकि जितना हो सके उसका फल मिल सके . वैसे उसके शरीर के साथ इतना खिलवाड़ हो रहा था जिसकी वजह से उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी ..पर वो कुछ कर भी नहीं सकती थी .

काफी देर तक उसके शरीर का आटा गूंथने के बाद सभी कि हालत बिगड़ सी गयी ..उनका वो हिसाब हो गया कि 'ये दिल मांगे मोर ..'

इसलिए सबसे पहले राजेश ने अपना लंड बाहर निकाला और एक हाथ से दिव्या का मुम्मा मसलते हुए अपने लंड को भी मसलने लगा ..

और उसकी देखा देखि थापा और हर्षित ने भी अपने-२ लंड बाहर निकाल लिए और उन्हें मसलने लगे ..

दिव्या ने कनखियों से देखा कि किस तरह सभी के घोड़े अस्तबल से बाहर निकल आये हैं और दौड़ने कि तैयारी कर रहे हैं ..इतने सारे लंड एक साथ उसने पहली बार देखे थे ..

अचानक थापा थोडा नीचे गया और उसने दिव्या कि टाँगे चौड़ी करते हुए अपने लंड को उसकी चूत के सामने रख दिया ..

हर्षित चिल्लाया : "अबे थापा ...बोला न ..ये मत कर ...समझता नहीं है साले ..''

थापा : "यार ....इतना कुछ तो कर ही रहे हैं ...अब ये भी कर डालते हैं ..''

हर्षित : "नहीं ...ये गलत है ..इसकी बेहोशी का ऐसे फायदा उठाना गलत है .."

राजेश : "हाँ थापा ....हर्षित सही केह रहा है ...अगर ज्यादा ही आग लगी है तो इसके मुंह में कर लेते हैं .."

हर्षित को भी राजेश कि बात सही लगी ..पर सवाल ये कौन डालेगा उसके मुंह के अंदर अपना लंड ..क्योंकि मुंह में लंड डालने कि बात सुनते ही सभी के चेहरे पर रौनक सी आ गयी थी ..

राजेश बोला : "मेरे पास एक आईडिया है ..."

और इतना कहते हुए उसने अपनी जेब से ताश कि गड्डी निकाल ली और बोला : "हम तीनो एक - २ पत्ता बाँटेंगे , जिसका बड़ा पत्ता आएगा वो डालेगा भाभी के मुंह में अपना लंड ..''

सभी को उसकी बात सही लगी ..दिव्या मन ही मन सोचने लगी कि यहाँ भी इन जुआरियों को जुआ खेलने से फुर्सत नहीं है ..

राजेश ने पत्ते निकाले और दिव्या के ऊपर ही पत्ते बांटने शुरू कर दिए , एक पत्ता दिव्या के दांये मुम्मे पर , दूसरा उसके बाएं मुम्मे पर और तीसरा उसकी चूत पर .


 तीनो के दिल कि धड़कन तेजी से चल रही थी ..सभी ने अपने-२ पत्ते उठा लिए ..और ऊपर वाले का नाम लेकर धीरे -२ देखा ..

थापा के पास बेगम आयी थी ..वो ख़ुशी से हवा में उड़ने लग गया ..राजेश के पास पांच नंबर था ..उसने पत्ते को नीचे वापिस दिव्या कि चूत पर फेंक दिया ..उसके ऊपर थापा ने अपनी बेगम फेंक दी ..

अब दोनों कि नजरें हर्षित पर थी ..उसने जैसे ही अपना पत्ता देखा वो ख़ुशी से उछल पड़ा ..उसके पास इक्का आया था ..उसने सीना फुला कर अपना पत्ता बेगम के ऊपर दे मारा ...

थापा का चेहरा फीका पड़ गया .. 

हर्षित अपने लंड को सहलाते हुए दिव्या के चेहरे कि तरफ आकर बैठ गया ..

अब तक दिव्या को भी पता चल चूका था कि क्या हुआ है ..और वो खुश भी थी कि हर्षित ये बाजी जीता है ..क्योंकि राजेश और थापा के दुर्गन्ध वाले शरीर के अपने पास बिठाकर ही वो इतनी परेशान थी कि उनके लंड अपने मुंह में लेने का सोचकर ही उसे उलटी सी आ रही थी ..

राजेश ने अपनी पेंट पूरी तरह से उतार दी ..और दिव्या के चेहरे के दोनों तरफ अपने घुटने मोड़कर अपने लंड को उसके चेहरे के आगे लटका दिया ..और फिर उसके गुलाब जैसी पंखुड़ी वाले होंठों को खोलकर उसके मुंह के अंदर अपना लंड धकेल दिया .

और धीरे-२ धक्के लगाकर उसके मुंह कि चुदाई करने लगा ..

दिव्या के मुंह के अंदर वो पूरा नहीं आ रहा था ..पर उसका चॉकलेटी स्वाद उसे बहुत पसंद आया था ..इसलिए उसने भी अपनी जीभ से उसके लंड कि सिंकाई करनी शुरू कर दी ..

एक पल के लिए तो हर्षित को लगा कि दिव्या उसके लंड को सच में चूस रही है ...वो सोचने लगा कि कहीं वो बेहोशी का नाटक तो नहीं कर रही ..और ये सोचकर वो थोड़ी देर के लिए रुक गया ..दिव्या को भी इसका आभास हो गया और उसने भी लंड कि चुसाई बंद कर दी ..और जब हर्षित को लगा कि सब ठीक है तो उसने फिर से अपने लंड को उसके मुंह के अंदर पेलना शुरू कर दिया ..

दूसरी तरफ थापा कि हालत खराब होने लगी ..उसके लंड से पिचकारी निकलने को हो रही थी ..उसने अपना मुंह सीधा लेजाकर दिव्या कि चिकनी चूत पर लगाया और वहाँ से निकल रहा शहद चूसते हुए अपने लंड को जोर से मसलने लगा ..

राजेश भी अपने चरम पर था, उसने भी दिव्या के दोनों स्तनों को बारी-२ से मसलते हुए अपने लंड कि नसों में सफ़ेद वीर्य का पर्वाह करने का पूरा इंतजाम कर लिया ..


 दिव्या के साथ जो भी हो रहा था , उसका मन कर रहा था कि वो उठ बैठे और पूरी तरह से भोगने दे सभी को अपना जिस्म ..पर ना जाने क्या उसे अंदर से वो सब कुछ करने से रोके हुआ था ..

सबसे ज्यादा मजा तो उसकी चूत से निकल रही तरंगो से मिल रहा था उसे ..जिसे थापा किसी जंगली कुत्ते कि तरह चाट रहा था .उसकी जीभ इतनी लम्बी थी कि चूत के आखिरी सिरे तक पहुंचकर वहाँ से भी मलाई को समेट कर ला रही थी . और उसके निप्पल तो उसकी बॉडी का सबसे सेंसेटिव पॉइंट थे , जिन्हे राजेश ऐसे मसल रहा था जैसे उनमे कोई जान ही ना हो ..कोई और मौका होता तो वो चिल्ला रही होती ..पर आज वो चिल्लाती भी कैसे, उसके मुंह में हर्षित का लंड जो था जिसे वो मुंह में भींचकर अपनी चीख को दबा रही थी .

अचानक थापा उठ बैठा और अपने लंड को दिव्या कि तरफ करके चिल्लाया : "अह्ह्हह्ह .......उम्म्म्म .....''

सभी समझ गए कि उसकी तोप के गोले निकलने वाले हैं ...और यही हाल राजेश और हर्षित का भी था ...हर्षित ने भी अपना लंड बाहर खींच लिया और दिव्या के साईड में आकर खड़ा हो गया ..राजेश तो पहले से ही उसके दूसरी तरफ खड़ा था ..

और फिर एक साथ सभी अपने-२ लंड मसलकर दिव्या के सेक्सी बदन को देखकर मुठ मारने लगे ..

सबसे पहले थापा के लंड कि बरसात हुई दिव्या के गर्म जिस्म पर ...उसपर वीर्य कि बूंदे पड़ते ही उसका जिस्म सुलग पड़ा ..

थापा चिल्लाया : "अह्ह्ह्हह्ह्ह .....भाभी .......ओह्ह्हह्ह .....दिव्या भाभी .......उम्म्म्म्म्म्म्म ....''

और उसने अपने लंड का पानी दिव्या के नाम कुर्बान कर दिया ..

और फिर राजेश और हर्षित ने भी एक साथ अपनी पिचकारियों से उसके शरीर को भिगोना शुरू कर दिया ..राजेश का निशाना उसके मुम्मे थे और हर्षित का निशाना उसका चेहरा ..

और देखते ही देखते दोनों ने अपने रस से उसके ऊपर सफ़ेद और गाड़े रस कि चादर सी बिछा दी ..

दिव्या को ऐसा लगा कि ठण्ड के मौसम में किसी ने उसके शरीर पर गर्म चादर औढ़ा दी हो ..वो पूरी तरह से उनके रस में नहाकर भीग गयी थी ..

और जब तूफ़ान थमा तो सभी सोचने लगे कि अब क्या किया जाए ..किसी कि समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे ...क्योंकि एक तो वो पूरी तरह से नंगी थी और ऊपर से उन्होंने उसके शरीर पर अपना वीर्य गिराकर उसे गन्दा भी कर दिया था ..

तभी दिव्या ने बेहोशी से उठने का नाटक करते हुए धीरे -२ हिलना शुरू कर दिया ...

हर्षित बोला : "लगता है होश आ रहा है ..एक काम करो ..इन्हे उठाकर किनारे पर लिटा दो ..''

थापा और राजेश ने दिव्या के हाथ पाँव पकड़कर उठाया और उसे नदी के किनारे पर लिटा दिया ..जहाँ का पानी उसके आधे शरीर तक आ रहा था ..और पानी कि एक दो लहरो ने आकर उसके शरीर पर लगे चिपचिपे रस को धोकर रख दिया ..

इतना करने के बाद सभी वहाँ से दुम दबा कर भाग लिए ..

उनके जाते ही दिव्या एक दम से उठ बैठी ..और उसका हाथ सीधा अपनी चूत के ऊपर गया और वो उसे मसलते हुए जोरों से बुदबुदाने लगी ...

''अम्म्म्म्म्म ......अह्ह्ह्हह्ह .......उम्म्म्म्म्म्म .....''

और अगले ही पल उसकी चूत से निकले गर्म पानी ने नदी के पानी में मिलकर वहाँ आग सी लगा दी ..

उसके बाद उसने अपने शरीर को पूरी तरह से साफ़ किया और उठकर अपने कपडे पहन लिए .और वापिस अपने घर कि तरफ चल दी .

मनीष गहरी नींद में सो रहा था ..वो चुपचाप जाकर उसकी बगल में सो गयी .आज कि रात उसकी जिंदगी में किसी फेंटेसी कि तरह थी .

अगला दिन काफी रोचक होने वाला था .

 अगले दिन जब दिव्या नींद से उठी तो कमरे में हरिया काका सफाई करने में लगे हुए थे ..शायद ये उनका रोज का नियम था ..मनीष बिस्तर पर नहीं था ..उसने टाइम देखा आठ बजने वाले थे ..अभी ज्यादा टाइम भी नहीं हुआ था ..अचानक रात कि बात याद करते हुए उसके शरीर से गर्मी सी निकलने लगी ..उसने साटन का गाउन पहना हुआ था ..और रात को जल्दबाजी के चक्कर में उसने ब्रा पेंटी भी नहीं पहनी थी ..

उसने हरिया काका से भी मजे लेने कि सोची ..क्योंकि कल उसके कमरे के बाहर ''किसी'' का वीर्य पड़ा मिला था , उसे पूरा विश्वास था कि वो हरिया काका का ही है ..और आज वो इस बात को कन्फर्म करना चाहती थी ..

उसने अपने शरीर पर पड़ी हुई चादर उतार कर नीचे कर दी .और अपने कूल्हे हरिया काका कि तरफ निकाल कर सो गयी ..

उसकी एक टांग दूसरी टांग के ऊपर चढ़ी हुई थी ..जिसकी वजह से उसकी गांड का एक हिस्सा तराशा हुआ सा बाहर निकल आया था ..और उसकी गांड का चीरा साफ़ दिख रहा था महीन कपडे के नीचे ..

हरिया काका जैसे ही झाड़ू मारते -२ उसकी तरफ पलटे वो वहीँ जम कर रह गए ..उनके हाथों से झाड़ू फिसल कर नीचे गिर गया ..उनके बूढ़े शरीर के अंदर से चिंगारियां सी निकलने लगी ..और बहुरानी कि सपाट गांड के उतार चढ़ाव देखकर उनकी धोती में उठाव आ गया ..और उनका पहलवान खड़ा होने लगा ..

दिव्या का मुंह जिस तरफ था वहाँ ड्रेसिंग टेबल रखा हुआ था इसलिए वो अपनी अधखुली आँखों से पीछे खड़े हुए हरिया काका कि हर हरकत देख पा रही थी ..उनके चेहरे पर आ रहे भाव को पड़ पा रही थी ..

हरिया काका थोड़ी देर तक तो बुत बने हुए खड़े रहे और फिर दरवाजे तक गए और बाहर झाँक कर देखा ..शायद सुनिश्चित करना चाह रहे थे कि मनीष आस पास तो नहीं है ..और फिर उन्होंने गजब कि हिम्मत का प्रदर्शन करते हुए दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और चिटखनी लगा दी ..

दिव्या को उनसे ऐसे बर्ताव कि उम्मीद बिलकुल नहीं थी ..उसका दिल जोर से धड़कने लगा ..

हरिया काका धीरे -२ उसके पास आये और दिव्या को आवाज लगायी : "बहु रानी ...ओ बहु रानी ..''

और एक दो आवाजों के बाद उसने दिव्या कि कमर के ऊपर हाथ रखकर उसे हिलाया ..वो तब भी नहीं उठी ..

तब हरिया समझ गया कि वो गहरी नींद में सो रही है ..और शायद ये सब उसने यही जानने के लिए किया था ..

दिव्या सोच ही रही थी कि ना जाने वो अब क्या करेगा, तभी हरिया का हाथ सीधा उसकी मखमली गांड के ऊपर आ लगा ..उसके दिल कि धड़कने और तेज हो गयी ..और फिर हरिया काका कि बूढ़ी उँगलियों कि ताकत जब उसे अपने मांसल कूल्हों पर महसूस हुई तो उसके शरीर में जल तरंग सी बजने लगे ..वो बहुत धीरे-२ अपनी उँगलियों के आगे वाले हिस्से को उसकी गांड कि चर्बी में दबा रहा था ..दिव्या को ऐसा लग रहा था जैसे उसके कूल्हों कि मसाज कर रहा है वो ..जो भी था, उसे ये सब महसूस करते हुए बहुत मजा आ रहा था ..

और फिर दिव्या को उनका दूसरा हाथ भी महसूस हुआ ... पहले कमर पर और फिर धीरे-२ खिसकता हुआ वो ऊपर आने लगा और पीठ पर फिसलने लगा ..शायद वो देखना चाह रहे थे कि दिव्या ने ब्रा पहनी हुई है या नहीं ..और ब्रा के स्ट्रेप का अवरोध ना मिलने पर उनके हाथ धीरे-२ खिसक कर आगे कि तरफ आने लगे ..

अपने शरीर के साथ ऐसा मादक एहसास तो उसे रात को भी महसूस नहीं हुआ था जब वो तीनो दोस्त उसे बेहोश समझ कर मजा ले रहे थे ..

हरिया काका के अनुभवी हाथों का सुखद एहसास हो रहा था दिव्या को ..

दिव्या सांस रोके उनके दूसरे हाथ को अपनी छातियों कि तरफ बढ़ता हुआ महसूस कर रही थी ..और वहाँ पहुँचते ही हरिया काका ने अपना पूरा पंजा उसकी ऊपर वाली लटकी हुई ब्रेस्ट के नीचे फंसा कर उसे ऊपर उठा लिया ..

दिव्या का पूरा शरीर जल सा उठा ..उसमे से आग सी निकलने लगी ..

और हरिया काका तो जैसे उसके मुम्मे का वजन नाप रहे थे ..या शायद उसका नरमपन ..

और जब उन्होंने अपनी हथेलियों को भींचा तो उसकी बड़ी सी ब्रेस्ट भी उनकी लम्बी उँगलियों के बीच फंस कर छोटी प्रतीत हुई ..उनकी उँगलियों ने उसकी वाटर बेलून जैसी ब्रेस्ट को चारों तरफ से जकड लिया ..और उनकी हथेली के बीचो बीच उसका खड़ा हुआ गर्म निप्पल आ लगा ..और एक पल के लिए तो हरिया को लगा कि दिव्या का वो खड़ा हुआ निप्पल उनकी हथेली में छेद कर देगा ..उन्होंने उसकी ब्रेस्ट पर अपनी पकड़ कम कर दी और अपनी उँगलियों से उसकी नरम खाल को महसूस करते हुए धीरे-२ सिकोड़ कर उसके निप्पल पर ले आये और एक साथ अपनी पांचो उँगलियों से उसके करोंदे जितने बड़े निप्पल को पकड़ लिया ..और जोर से खींच कर बाहर कि तरफ उभारा ...

दिव्या के मुंह से चीख निकलते -२ बची ...

और फिर उन्होंने और हिम्मत का प्रदर्शन करते हुए दिव्या के गाउन में आगे कि तरफ लगी हुई चैन खोल दी ..और चैन के खुलते ही उसका बड़ा सा मुम्मा फिसल कर बाहर आ निकला ..









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