Wednesday, February 18, 2015

Fentency अब तू ही ठंडा कर

Fentency


अब तू ही ठंडा कर 

लेखक : राज कार्तिक
हाय दोस्तो... कैसे हो जी.. मस्त ना.. मस्त ही रहना !
मैं आप सबका बहुत शुक्रगुजार हूँ कि आप सब मेरी कहानी पढ़ने के बाद मुझे मेल करके मेरा हौसला बढ़ाते हैं। आप सबकी मेल पढ़ कर मेरा भी मन मचल उठता है आप सबको चुदाई की दास्ताँ बताने के लिए।
आज जो कहानी मैं आप सबके लिए लेकर आया हूँ उसमें मैं शरीक नहीं हूँ पर यह मेरी आँखों देखी चुदाई की घटना है। मैं तो अपनी ही मस्ती में रहता था। अड़ोस-पड़ोस की बातों पर मैं कभी गौर नहीं करता था पर तभी मुझे कुछ ऐसा पता लगा कि यह कहानी बन गई।
प्रियंका चौधरी नाम है उसका। उम्र यही कोई चौबीस पच्चीस के आस पास। शादी को चार साल हो चुके है प्रियंका की। एक बच्चे की माँ है वो ! जब वो शादी करके ससुराल आई थी तो उसका बदन किसी कमसिन कली जैसा नाजुक सा था पर अब जब से वो माँ बनी है उसका शरीर कुछ भर सा गया है तो मस्त माल बन गई है प्रियंका।
अब आती है कहानी की बात...
प्रियंका का घर मेरे घर के बिल्कुल सामने ही है। उस दिन दोपहर में मैं छत पर किसी काम से गया तो मुझे प्रियंका के घर में कुछ हलचल सी महसूस हुई। तभी प्रियंका के घर से उसके चिल्लाने की आवाज आई। मैंने उसके चिल्लाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्यूंकि उसके घर में तो अक्सर झगड़ा होता रहता था।
पर उसी शाम को मेरे कॉलोनी के ही एक लड़के ने मुझे कुछ ऐसा बताया कि मैं समझ ही नहीं पाया कि यह सच है या झूठ।
उसने मुझे बताया था कि प्रियंका के ससुर राम सिंह चौधरी ने प्रियंका के चुच्चे मसल दिए थे इसीलिए प्रियंका दिन में चिल्ला रही थी।
"चुचे मसल दिए थे? और वो भी उसके ससुर ने...?"
मैं विश्वास नहीं कर पा रहा था। मैंने उसकी बात को मजाक समझ कर नजरंदाज कर दिया। पर उसकी बात सुन कर मेरे अंदर सच जानने की बेचैनी बढ़ गई थी। प्रियंका का पति अक्सर हफ्तों के लिए घर से बाहर रहता था तो मुझे लगा कि बात सच भी हो सकती है।
अब तो मेरी नजर हर समय प्रियंका के घर पर लगी रहती। रविवार के दिन जब घर पर होता तो सारा दिन बस इसी काम पर लगा रहता। करीब पन्द्रह दिन हो गए थे नजर रखते हुए पर अभी तक कुछ नजर नहीं आया था। एक फायदा जरूर हो गया था कि प्रियंका से मेरी नजरें चार होने लगी थी। वो शायद यह समझ रही थी कि मैं उसको पटाने के मूड में हूँ पर उसे क्या पता था कि मेरा इरादा क्या है।
उस दिन भी रविवार था, मैं सुबह सुबह ही कुछ लेने के बहाने से उनके घर गया तो पता लगा कि घर में आज सिर्फ प्रियंका और उसका ससुर ही है। उसकी सास उसके देवर को लेकर किसी रिश्तेदारी में गई थी और पति तो पहले से ही बाहर गया हुआ था। मुझे एहसास हुआ कि आज कुछ ना कुछ देखने को मिल सकता है।
गर्मियों के दिन थे तो दोपहर के समय कॉलोनी की गलियाँ खाली पड़ी थी। हमारा घर भी एक बंद गली में है तो उसमे वैसे भी लोगों का आना जाना ना के बराबर ही होता है। मेरे कान और आँख दोनों प्रियंका के घर पर ही लगे थे। करीब दो बजे मुझे प्रियंका के जोर जोर से बोलने की आवाज आई तो मैं सतर्क हो गया।
मैं अपने घर से निकला और प्रियंका के घर की खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया।
"पापा जी... कुछ तो शर्म करो... बहू हूँ मैं तुम्हारी..."
"बहु जो मर्जी कह पर अब मुझ से नहीं रुका जाता... जब से तेरी जवानी देखी है मेरे लण्ड में दुबारा से मस्ती चढ़ने लगी है।"
"बुड्ढे कुछ तो शर्म कर... ज्यादा आग लगी है तो अपनी औरत के पास जा... मुझे क्यों खराब करने पर तुला है?"
"बस एक बार बहू... सारी उम्र तेरी गुलामी करूँगा..."
"आह्ह... पापा जी छोड़ो मुझे... आह चूची छोड़ो मेरी... दर्द हो रहा है.... उईई माँ... बहनचोद छोड़ मुझे !"
मैं समझ गया था कि बुड्ढा पूरी रौनक में है और आज तो वो प्रियंका की चूत फाड़ कर ही मानेगा। अंदर की आवाजें सुन कर मेरी बेचैनी बढ़ गई थी। अब तो मैं यह देखने को बेचैन था कि आखिर कमरे में हो क्या रहा है। मैं अंदर झाँकने के लिए जगह ढूँढ रहा था। तभी मुझे ध्यान आया कि प्रियंका के घर के पिछली तरफ खाली प्लाट है और उस तरफ की दीवार भी बहुत नीची है।
मैं दौड़ कर उधर गया। पर नजर फिर भी कुछ नहीं आया। मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
आखिर में मैंने थोड़ा खतरा मोल लेने का मन बना लिया और फिर बिना देर किये मैं दीवार फ़ांद कर प्रियंका के घर के अंदर घुस गया। दबे पाँव मैं उस कमरे के दरवाजे पर पहुँच गया जिसमें से उन दोनों की आवाजें आ रही थी।
"पापा जी मत करो ऐसा... अगर तुम्हारे बेटे को पता लग गया तो सोच लो वो तुम्हारी क्या हालत करेगा !"
"प्रियंका अब कुछ मत बोल बेटा... अब मैं नहीं रुक सकता..."
"आह्हह्ह !" प्रियंका की बड़ी सी आह सुनकर मैं समझ गया कि बुड्ढा कुछ कर रहा है। मैंने कमरे के अंदर झाँका तो मेरा लण्ड जो पहले से ही खड़ा हो चुका था, फटने को हो गया। मैंने देखा कि बुड्ढा नीचे से बिलकुल नंगा होकर अपना लण्ड सहला सहला कर खड़ा कर रहा था।प्रियंका बेड पर बैठी हुई थी और रो रही थी। रामसिंह बीच बीच में उसकी चूची को पकड़ कर मसलता तो वो छटपटा उठती थी।
मुझे प्रियंका का ऐसे बेड पर बैठे रहना अजीब लग रहा था क्यूंकि अगर प्रियंका चुदवाना नहीं चाहती थी तो वो बेड पर इतने आराम से कैसे बैठी थी। वो उठ कर बाहर क्यों नहीं आ रही थी या क्यों नहीं वो बूढ़े का ज्यादा विरोध कर रही थी। दाल में कुछ काला जरूर था।
तभी राम सिंह ने प्रियंका का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रखा। प्रियंका ने एक बार तो हाथ पीछे खींच लिया पर जब राम सिंह ने दुबारा उसका हाथ पकड़ कर लण्ड पर रखा तो वो रोते हुए राम सिंह का लण्ड सहलाने लगी। राम सिंह अब आँखें बंद करके आहें भर रहा था।
कुछ देर बाद राम सिंह ने प्रियंका को लण्ड चाटने के लिए कहा तो प्रियंका ने मना कर दिया। राम सिंह ने जबरदस्ती लण्ड मुँह में घुसाया तो प्रियंका ने मुँह झटक कर लण्ड बाहर निकाल दिया।
राम सिंह थोड़ा नाराज हुआ और फिर वो प्रियंका के कपड़े उतारने लगा। नजारा बहुत मस्त तैयार हो रहा था तो मैंने झट से मोबाइल निकाला और उनकी मूवी बनाने लगा। प्रियंका थोड़ा विरोध कर रही थी पर राम सिंह ने कुछ ही देर में प्रियंका को नंगा कर दिया।
प्रियंका का नंगा बदन देख कर मेरी हालत खराब होने लगी थी। दिल कर रहा था कि अभी कमरे में घुस जाऊँ और बूढ़े की गाण्ड पर लात मार कर बाहर निकाल दूँ और खुद ही चोद डालूं उस मदमस्त जवानी को।
नंगी होने के बाद प्रियंका अपने हाथों से अपनी चूचियों और चूत को छुपाने की कोशिश करते हुए बेड पर बैठ गई। तभी राम सिंह ने उसको धक्का देकर बेड पर लेटा दिया और खुद उसकी टांगों के बीच बैठ कर उसकी चूत चाटने लगा।
प्रियंका का विरोध अब लगभग खत्म हो गया था। अब रोने की आवाज सिसकारियों और सीत्कारों की आवाज में बदल गई थी।
"आह्ह... पापा जी... ओह्ह्ह... आह्ह्ह... मत कर कमीने..." प्रियंका बड़बड़ा रही थी। उसके हाथ अब राम सिंह का सिर अपनी चूत पर दबा रहा था जिससे एहसास हो रहा था कि प्रियंका भी अब चुदास से भरने लगी थी।
दो मिनट के बाद कमरे का नजारा ही बदल गया था। प्रियंका पूरी गर्म हो गई थी और उसने अब राम सिंह को अपने नीचे कर लिया था। अब वो राम सिंह के मुँह के ऊपर बैठ कर अपनी चूत चटवा रही थी।
"बहन के लण्ड... बेटी चोद... खा मेरी चूत को खा जा... आह्ह... खा मेरी चूत को खा...ओह्ह्ह..."
प्रियंका मस्ती में बड़बड़ा रही थी और राम सिंह की बोलती बंद थी। वो चुपचाप पड़ा प्रियंका की चूत चाट रहा था। कुछ देर बाद प्रियंका नीचे उतरी और राम सिंह के लण्ड को जोर जोर से मसलने लगी। राम सिंह का लण्ड पूरे शवाब पर आ चुका था। मुझे भी प्रियंका की चुदाई बहुत नजदीक लग रही थी। तभी प्रियंका नीचे बैठ कर राम सिंह के लण्ड को मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी और राम सिंह मस्ती के मारे बेहाल हो गया।
कुछ देर लण्ड चुसवाने के बाद राम सिंह ने प्रियंका को उठा कर फिर से बेड पर लेटा दिया और एक तकिया प्रियंका के चूतड़ों के नीचे लगा दिया। जैसे ही राम सिंह ने अपने लण्ड का लाल लाल सुपाड़ा प्रियंका की चूत पर रखा तो प्रियंका मस्ती से चिल्ला उठी।
"अब जल्दी से अंदर डाल बेटी चोद... अब किसकी इंतज़ार कर रहा है।"
राम सिंह ने बिना कुछ कहे एक जोरदार धक्का लगा दिया और लण्ड प्रियंका की चूत में उतार दिया। प्रियंका एकदम से चीख पड़ी थी।
"बहुत मोटा है कमीने तेरा तो... काश तेरे बेटे का भी तेरे जैसा होता..."
इससे आगे प्रियंका कुछ बोल पाती, इससे पहले ही राम सिंह ने दो तीन ताबड़तोड़ धक्के लगा कर पूरा लण्ड प्रियंका की चूत में उतार दिया।
प्रियंका दर्द के मारे छटपटा गई।
पूरा लण्ड घुसाने के बाद राम सिंह थोड़ा रुका और प्रियंका की चूचियों को चूसने लगा। प्रियंका की छटपटाहट कम हुई तो राम सिंह ने धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। प्रियंका का चुदक्कड़ रूप सामने आने लगा था। वो भी अब हर धक्के का जवाब अपने कूल्हे उठा उठा कर देने लगी थी।
"चोद मेरे बूढ़े राजा...चोद मुझे... तेरा बेटा तो आग लगा कर भाग जाता है... अब तू ही ठंडा कर इस आग को... चोद अपने मोटे लण्ड से मुझे जोर जोर से चोद... पूरा जोर लगा बूढ़े..." प्रियंका अब राम सिंह को जोर जोर से चोदने के लिए उकसा रही थी।
राम सिंह भी लंबे लंबे धक्के लगा लगा कर प्रियंका को चोद रहा था।
वो दोनों चुदाई में मग्न थे पर मेरा लण्ड अब दर्द करने लगा था। मन में आया कि वापिस चलूँ पर सजीव चुदाई देखने का मौका बार बार नहीं आता है सो वहीं खड़े खड़े लण्ड को बाहर निकाल कर मसलने लगा।
लगभग आठ दस मिनट की चुदाई के बाद प्रियंका झड़ गई तो राम सिंह भी चिल्ला उठा," मैं गया.... मैं गया..."
और आठ दस धक्कों के बाद ही वो प्रियंका के ऊपर औंधे मुँह गिर पड़ा। प्रियंका ने भी अपनी टांगों में जकड़ लिया अपने ससुर जी को और प्यार से उसके बालों में हाथ फेरने लगी। दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे।
चुदाई पूरी हो चुकी थी। अब मैं भी वहाँ खड़ा होकर क्या करता सो चुपचाप दीवार कूद कर अपने घर वापिस आया और बाथरूम में जाकर लण्ड को शान्त किया।
कुछ दिन बाद प्रियंका मुझे अकेली मिली। उसने मुझे बताया कि उस दिन उसने मुझे उन दोनों की चुदाई देखते देख लिया था। मुझे विश्वास नहीं हुआ। आज भी प्रियंका मुझ से चुदने को तैयार बैठी है पर ना जाने क्यूँ उसको चोदने का मेरा मन ही नहीं होता है। मुझे पता है कि वो आज भी अपने ससुर से चुदवाती होगी। बस यही सोच कर मैं पीछे हट जाता हूँ।
कैसी लगी यह कहानी दोस्तो...!!





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